संकट कटे मिटे सब पीरा , जो सुमिरै हनुमत बलबीरा…। सुंदरकांड पाठ की इन चौपाइयाें का महत्व कौन नहीं जानता। पहले मंदिरों में सुंदरकांड पाठ के जरिए बालाजी की महिमा का गुणगान किया जाता था, लेकिन अब बदलाव हो चुका है। आलम ये है कि चाहे वो मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम हो या गृह प्रवेश का कार्यक्रम या दफ्तर का शुभारंभ, प्रथम पूजनीय भगवान गणपति की पूजा के बाद संकट हरने के लिए घरों व दफ्तरों में संगीतमय सुन्दर काण्ड पाठ का आयोजन हो रहा है। पहले विशेष अवसरों पर ही सुन्दरकाण्ड पाठ का आयोजन किया जाता था। लेकिन वर्तमान में किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में सुंदरकांड पाठ करवाया जा रहा है।
सामूहिक रूप से 108 आसन पर हो रहे सुंदरकांड पाठ
शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण अंचल, सभी जगह सुंदरकाण्ड पाठ का स्वरूप भी बदलने लगा है। सामूहिक रूप से संगीत के माध्यम से सुंदरकाण्ड पाठ का आयोजन किया जा रहा है। मंदिरों में अब सुंदरकाण्ड का पाठ 108 आसन पर सामूहिक रूप से करवाया जा रहा है।
घर में प्रवेश पर भी बालाजी का गुणगान
अब तो गृह प्रवेश के दौरान धार्मिक अनुष्ठान के बाद परिवारों में सुंदरकाण्ड पाठ करवाया जाने लगा है। इसके पीछे मान्यता ये है कि इससे पॉजिटिविटी आती है।
समितियां करवा रही सुन्दरकाण्ड पाठ
सुन्दरकाण्ड पाठ को लेकर सामाजिक स्तर पर समितियां बनी हुई हैं, जो वाद्य यंत्र के साथ संगीतमय सुन्दरकाण्ड करवा रहे हैं। कई जगह समितियां निशुल्क पाठ कर रही है। पुरुषों के साथ अब महिला मंडल भी सुन्दरकाण्ड पाठ का सामूहिक रूप से आयोजन करवा रही हैं।
एक्सपर्ट व्यू पीयूष एम त्रिवेदी
सुन्दरकाण्ड रामचरितमानस का पांचवां सोपान है। सुन्दर काण्ड में सुन्दर शब्द आठ बार आया है। रामचरितमानस सुन्दरकाण्ड को लेकर समाज जागरूक हो रहा है। वर्तमान समय में सुन्दरकाण्ड का प्रचलन बढ़ा है। रामचरितमानस की प्रत्येक चौपाई, छंद, सोरठा, श्लोक, दोहा का महत्व है, यही कारण है कि युवाओं का रुझान सुन्दर काण्ड पाठ की ओर बढ़ रहा है। मंदिरों के साथ साथ अब घरों में भी सुन्दरकाण्ड पाठ का आयोजन हो रहा है। सुन्दरकाण्ड में जीवन जीने के आदर्श के साथ विनम्रता, नीति, शरणागतता, वास्तुकला, सेवक का धर्म, नाम महिमा दूत के कर्तव्य, अष्ठ सिद्धि नव निधि का वर्णन, सत्संग की महिमा, साधु के लक्षण का बोध होता है।