Teacher's Day Special : 15 साल की नौकरी में 25 नवाचार, बस्ते का बोझ कम कराने 12 साल लड़ी जंग

- बेमिसाल शिक्षक का लोगो लगाएं
- जालोर के रेवत विद्यालय में व्याख्याता है संदीप जोशी
- नवाचार कर शिक्षा से बच्चों को जोड़ा

By: rajendra denok

Published: 05 Sep 2020, 01:45 PM IST

-राजेन्द्रसिंह देणोक
पाली। जालोर जिले की राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रेवत में व्याख्याता है संदीप जोशी। जोशी ने 15 साल की नौकरी में 25 नवाचारों के जरिए देशभर में अपनी छाप छोड़ी है। जोशी ऐसे संवेदनशील और क्रिएटिव शिक्षक है जिन्होंने मासूमों के कंधे से बस्ते का बोझ कम करने की जंग 12 साल तक लड़ी और आखिर में विजय का वरण किया। जोशी जैसे शिक्षक न केवल विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है, अपितु शिक्षकों के लिए भी अनुकरणीय है। अब तक उनकी तीन स्कूलों में नियुक्ति रही है। जहां भी रहे स्कूल को ऐसा चमन किया कि पूरे शिक्षा जगत के लिए नजीर बन गए।

40 लाख बच्चों के कंधों से उतारा बोझा
जोशी ने 2008 में बस्ते का बोझ कम कराने की मुहिम छेड़ी। राज्य सरकार को त्रैमासिक पाठ्यक्रम का प्रस्ताव दिया। जिसमें एक ही पुस्तक में सभी विषय समाहित किए गए। 2010 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने मोहर लगाई। तत्पश्चात एनसीआरटी ने शिक्षा सचिवों की बैठक में देश के एकमात्र शिक्षक के रूप में जोशी को आमंत्रित किया। बस्ते का बोझ कम करने और शनिवार को बेग फ्री करने का जोशी का सुझाव सराहा। वर्तमान में 11 राज्यों में यह लागू किया जा चुका है। इसमें राजस्थान भी शामिल है। इसके अलावा प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के पाठ्यक्रम में भी इसी सत्र से बदलाव होगा। जिसमें त्रैमासिक पाठ्यपुस्तकें होंगी। तीन माह तक का कोर्स एक ही पुस्तक में होगा। इस योजना के लागू होने के बाद राजस्थान बस्ते के बोझ को कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाने वाला पहला राज्य बन गया है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत पिछले वर्ष राज्य के सभी 33 जिलों के एक-एक विद्यालय में यह मॉडल शुरू किया गया था। जोशी वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के सदस्य भी है।

कोरोनाकाल में जगाया पुस्तक प्रेम अभियान
जोशी ने पुस्तकों के प्रति प्रेम जगाने के लिए कोरोनाकाल में ‘पठ्ेतपुस्तकम’ अभियान चलाया। इसके तहत विद्यार्थियों को अच्छी पुस्तकें पढऩे के लिए प्रेरित किया। सोशल मीडिया पर पुस्तकों के नाम भी साझा किए।

समूचे देश का दर्शन करा रहा गलियारा
जोशी की अब तक रेवत, गोदन व सामतीपुरा विद्यालय में तैनाती रही है। उन्होंने तीनों ही विद्यालयों की कायापलट कर दी। विद्यार्थियों का ज्ञान बढ़ाने के लिए रेवत गांव की स्कूल के बरामद को भारत दर्शन गलियारे में परिवर्तित किया। इसमें देश का नक्शा, राज्य, भाषा, संस्कृति, ग्रंथ इत्यादि अंकित है।

यों लगा दी नवाचारों की झड़ी
-समरसता सरस्वती मंदिर
-भारत दर्शन गलियारा
-विज्ञान प्रयोगशाला
-कक्षा उपस्थिति में यस सर नहीं जय हिंद
-स्वास्थ्य गलियारा-कन्या पूजन
-बरामदा पुस्तकालय-बस्ता मुक्त शनिवार
-विज्ञान वाटिका
-क्लास रूम क्रिकेट-टिचिंग मैथड
-ज्ञान कोष से बस्ते का बोझ कम करना
-राष्ट्रीय पर्व पर सामुदायिक सहभागिता
-ज्ञान पर्यटन-स्कूल टूरिज्म
-अनुठी गुरुदक्षिणा
-मासिक पर्यावरण संकल्प
-शबरी महोत्सव
-देशभक्ति अनलिमिटेड स्टीकर्स
-पहली-दूसरी के छात्रों को स्वच्छ भारत की सीख
-शब्द मित्र यंत्र
-मेरा स्कूल मेरा गौरव
-ज्यामिति वाटिका
-पठ्ेत पुस्तकम
-श्रीरामायण जी का गृहकार्य
-शिक्षा नाद योजना

rajendra denok Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned