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Jawai Rajasthan: अरावली की गोद में बसा जवाई क्षेत्र, जहां पैंथरों और इंसानो के बीच है अनोखा रिश्ता

पाली जिले का जवाई क्षेत्र इंसान और पैंथर के सह-अस्तित्व की अनोखी मिसाल माना जाता है। यहां शाम होते ही पैंथर पहाड़ियों से उतरकर गांवों और सड़कों तक पहुंच जाते हैं, लेकिन वर्षों से स्थानीय लोग इनके साथ सामान्य जीवन जीते आ रहे हैं।

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पाली

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Nikhil Parmar

Jun 15, 2026

jawai rajasthan

पाली जिले का जवाई क्षेत्र में पैंथर

Jawai Rajasthan: पैंथर का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में जंगल और खतरे की तस्वीर आती है। लेकिन पाली जिले का जवाई क्षेत्र इस धारणा से बिल्कुल अलग कहानी पेश करता है। यहां पैंथर केवल पहाड़ियों तक सीमित नहीं हैं। शाम ढलते ही वे कई बार पहाड़ियों से नीचे उतरकर गांवों के आसपास, कच्चे रास्तों और सड़कों पर भी दिखाई दे जाते हैं। यहां पैंथरों के लिए कोई अलग से बाडाबंदी नहीं कर रखी हैं। हैरानी की बात यह है कि इतनी नजदीकी के बावजूद यहां इंसान और पैंथर के बीच संघर्ष की घटनाएं बहुत कम सुनने को मिलती हैं।

अरावली की पहाड़ियों में बसा है जवाई

जवाई क्षेत्र पाली जिले में जवाई बांध और उसके आसपास फैली अरावली की पहाड़ियों और विशाल चट्टानों के लिए जाना जाता है। इन पहाड़ियों की प्राकृतिक गुफाएं और चट्टानों की दरारें पैंथरों के लिए सुरक्षित ठिकाने का काम करती हैं। यही वजह है कि जवाई आज देश के चर्चित लेपर्ड क्षेत्रों में गिना जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि यहां पैंथरों के लिए कोई बड़ी घेराबंदी या बंद क्षेत्र नहीं बनाया गया है। गांव, खेत, मंदिर, पहाड़ियां और वन्यजीव एक ही परिदृश्य का हिस्सा हैं।

जब मंदिर के रास्ते में दिख जाए पैंथर

जवाई क्षेत्र के पेरवा गांव के पास पहाड़ी पर एक मंदिर स्थित है, जहां नियमित रूप से श्रद्धालु और पुजारी आते-जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार पैंथर कई बार इस इलाके में दिखाई देते हैं और मंदिर के आसपास भी नजर आ जाते हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों के बीच दहशत का माहौल नहीं रहता।

स्थानीय लोग बताते हैं कि वर्षों से वे इन वन्यजीवों के साथ रह रहे हैं और उन्हें देखकर घबराने के बजाय सामान्य व्यवहार करते हैं। यही समझ इस क्षेत्र को खास बनाती है।

‘पैंथर हमारे पड़ोसी जैसे हैं’

पाली के पेरवा गांव के निवासी लोकेश मोबारसा बताते हैं कि उन्हें बचपन से पैंथर दिखाई देते रहे हैं। उनके अनुसार गांव में कई बार लोगों ने पैंथरों को बेहद करीब से देखा है, लेकिन ऐसी कोई बड़ी अप्रिय घटना याद नहीं आती जिसने पूरे गांव को दहशत में डाल दिया हो।

वे कहते हैं, “यहां पैंथर दिख जाना हमारे लिए सामान्य बात है। कई बार हम अपने काम से जा रहे होते हैं और सामने पहाड़ी या रास्ते में पैंथर नजर आ जाता है। अब तो ऐसा लगता है जैसे वे हमारे पड़ोसी हों।”

सह-अस्तित्व की मिसाल बना जवाई

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान के जवाई की पहचान केवल पैंथरों की वजह से नहीं, बल्कि यहां विकसित हुए सह-अस्तित्व के मॉडल के कारण है। स्थानीय समुदाय और वन्यजीवों के बीच वर्षों से बना संतुलन इस क्षेत्र को अलग पहचान देता है।

देश के कई हिस्सों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन जवाई यह दिखाता है कि प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर भी रहा जा सकता है। शायद यही कारण है कि पाली का यह इलाका आज केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि इंसान और वन्यजीवों के शांत सह-अस्तित्व की एक अनोखी मिसाल के रूप में जाना जाता है।

पैंथरों की संख्या और संरक्षण

जवाई को राजस्थान में पैंथरों के सबसे चर्चित इलाकों में माना जाता है। वन्यजीवों पर काम करने वाले कई विशेषज्ञों और रिपोर्टों के अनुसार यहां करीब 50 से 60 पैंथर होने का अनुमान लगाया जाता है। हालांकि इनकी संख्या समय के साथ कम-ज्यादा हो सकती है। पैंथरों और उनके रहने के इलाके को सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार ने जवाई के एक बड़े हिस्से को जवाई बांध लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया है। यहां वन विभाग निगरानी रखता है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता है कि पैंथर और स्थानीय लोग दोनों सुरक्षित रह सकें।