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लूनी बांध छलका, फिर भी प्यासी रह गई लूनी नदी, किसानों की उम्मीदें टूटी

मानसून हुआ विदा : कुएं नहीं हो पाए रिचार्ज- दो दर्जन गांवों में किसानो के नहीं होंगे कुएं रिचार्ज

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पाली

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Suresh Hemnani

Oct 07, 2020

लूनी बांध छलका, फिर भी प्यासी रह गई लूनी नदी, किसानों की उम्मीदें टूटी

लूनी बांध छलका, फिर भी प्यासी रह गई लूनी नदी, किसानों की उम्मीदें टूटी

पाली/रायपुर मारवाड़। जिले के रायपुर उपखण्ड़ क्षेत्र का प्रमुख लूनी बांध इस बार भी छलका, लेकिन छलकने में हुई देरी से लूनी नदी प्यासी रह गई। इधर, मानसून भी अलविदा कर गया। ऐसे में दो दर्जन गांवों के किसान नदी के ऊ फान से चलने के बाद कुएं रिचार्ज होने की उम्मीद लगाए बैठे थे। इस उम्मीद पर पानी फिर गया है। इस बार कु एं रिचार्ज नहीं हो पाने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।

क्षेत्र में इस बार मानसून की मेहरबानी तो हुई लेकिन उम्मीद से कम। इससे लूनी बांध मानसून के विदा होने के अंतिम दिनों में लबालब हुआ। बांध के लबालब होने के बाद दुबारा अच्छी बारिश नहीं हुई। हालांकि पहाड़ी क्षेत्र के भोमादा बांध ओवरफ्लो होने से उस बांध का पानी लूनी बांध में शामिल हुआ। नतीजन लूनी बांध भी छलक गया, लेकिन बांध पर चादर फीट की बजाय तीन से चार इंच तक ही चली। बारिश थम जाने से आवक धीमी हो गई।

15 दिन चली चादर, 15 किलोमीटर भी नहीं पहुंचा पानी
लूनी बांध की चादर 15 दिन पहले चली थी। रफ्तार धीमी होने से नदी का पानी 15 दिन में 15 किलोमीटर भी नहीं पहुंच पाया। हालात ये कि बांध का पानी सम्पर्क सडक़ों को लांघ कर गुजरा करता था, वह पानी अब सडक़ों के नीचे डाल रखे पाइप से होकर आगे निकल रहा है।

यहां करते रह गए इंतजार
लूनी बांध का पानी दीपावास सम्पर्क सडक़ के बाद स्थानीय कस्बे की प्रमुख सम्पर्क सडक़ को पार कर गया। ये पानी दो दर्जन गांवों तक पहुंचने की बजाय लूनी नदी हाइवे पुल तक ही पहुंच ठहर गया। वजह ये कि आवक धीमी होते हुए बंद सी हो गई है। जिससे बिचड़ी, करमावास, कुशालपुरा, निम्बेड़ा, अटपड़ा सहित दो दर्जन गांवों के किसान नदी के उनके गांव तक पहुंचने की राह देखते रह गए।

पिछले साल को याद कर हो रहे मायूस
पिछले साल लूनी बांध की चादर तीन माह से भी अधिक समय तक चली थी। हालात ये कि लूनी बांध का पानी दो दर्जन गांवों के किसानों के कुएं रिचार्ज करता हुआ सोजत तहसील के एनिकट व बांध तक पहुंच गया था। पिछले साल के हालात को याद कर किसान मायूस हो रहे हैं। अब हालात ये कि जिन किसानों के कुएं में पिछले साल का पानी है वे ही कृषि कर पाएंगे, जबकि जिन किसानो के कु ए का जलस्तर गिर चुका है, उन्हें अब अगले साल तक इंतजार करना पड़ेगा।

अब उम्मीद नहीं के बराबर
लूनी बांध पन्द्रह दिन पहले छलका था, लेकिन आवक धीमी होने से चादर का वेग कम रहा। ऐसे में लूनी नदी में पानी तेज वेग से नहीं पहुंच पाया। दुबारा बारिश नहीं हुई। इससे आवक धीमी होते हुए बंद सी हो गई है। मानसून भी विदा हो चुका है। ऐसे में अधिकांश किसानों के कुएं रिचार्ज होने से रह गए। -आरके. पुरोहित, एइएन, सिंचाई विभाग, रायपुर