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राजस्थान का यह प्रोजेक्ट बदलेगा मारवाड़ की तस्वीर

विनोद सिंह चौहान पश्चिमी राजस्थान में उद्योग और रोजगार की तस्वीर बदलने वाले जोधपुर-पाली इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर (दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर) का राज्य सरकार के इस कार्यकाल में शिलान्यास करना सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंशा है कि आचार संहिता लगने से पहले इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास किया जाए।

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पश्चिमी राजस्थान में उद्योग और रोजगार की तस्वीर बदलने वाले जोधपुर-पाली इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर (दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर) का राज्य सरकार के इस कार्यकाल में शिलान्यास करना सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंशा है कि आचार संहिता लगने से पहले इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास किया जाए, लेकिन खातेदारी जमीन अवाप्ति अभी भी रोड़ा बनी हुई है। हाल ही में हुई जनसुनवाई में मुआवजे की मांग को लेकर किसान मुखर हो गए थे। इससे सरकार की चिंता और बढ़ गई है। आचार संहिता से पहले पांच गांवों की जमीन का मसला हल नहीं हुआ तो कॉरिडोर का शुभारंभ लंबा खिंच सकता है।

ले आउट प्लान की स्वीकृति का भी इंतजार

कॉरिडोर का ले आउट प्लान केन्द्र सरकार से अब तक स्वीकृत नहीं हुआ है। इसका भी बेसब्री से इंतजार है। प्लान की स्वीकृति के बाद ही कदम आगे बढ़ सकेंगे। केन्द्र सरकार से पर्यावरणीय क्लीयरेंस मिल चुकी है और कॉरिडोर के लिए 1060 हेक्टेयर भूमि चिह्नित कर राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (रीको) के नाम भी की जा चुकी है। कॉरिडोर में 5 गांवों की 1086.4483 हेक्टेयर जमीन निजी खातेदारों से अधिग्रहण करनी है। उधर, किसान जमीन सौंपने के लिए राजी नहीं है। उनका कहना है कि मुआवजा कम दिया जा रहा है। जनसुनवाई में किसान अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं।

2023 में पहला चरण पूरा करने का लिया था लक्ष्य

खुशखेड़ा-नीमराणा की तरह दिल्ली-मुंबई फ्रेट कॉरिडोर (डीएमएफसी) के किनारे जोधपुर-पाली के बीच नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए धीमी ही सही, लेकिन कवायद एक दशक से जरूर चल रही है। इस परियोजना को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहला चरण इसी साल पूरा करने की चुनौती है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इसे लेकर काफी गंभीर है। उन्होंने अधिकारियों से कई बार फीडबैक भी लिया। परियोजना को गति देने के लिए जोधपुर-पाली-मारवाड़ कॉरिडोर नाम से प्राधिकरण का गठन भी हो चुका है। केन्द्र सरकार की टीमें भी रोहट क्षेत्र में कई बार दौरा कर चुकी हैं।

...तो यह होंगे फायदे

-पश्चिमी राजस्थान का औद्यागिक अब रोहट क्षेत्र बनेगा।

-कॉरिडोर में कई तरह के उद्योग स्थापित होंगे। यहां स्पेशल इनवेस्टमेंट जोन बनाया जाएगा।

-करीब दो लाख लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल सकेगा।

-रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

-पाली, जोधपुर, बाड़मेर इत्यादि जिलों को सीधा फायदा पहुंचेगा।

-मारवाड़ जंक्शन के जरिए औद्योगिक इकाइयों का माल तीव्र गति से अन्य राज्यों में पहुंचाया जा सकेगा।
-रोहट क्षेत्र की डेढ़ सौ किलोमीटर परिधि में औद्योगिक विकास तेजी से होगा।

फैक्ट फाइल

-2006 के दिसम्बर में केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग और केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ट्रेड और उद्योग तथा जापान सरकार के बीच एमओयू हुआ था।

-2008 में डीएमआइसी डवलपमेंट कॉरपोरेशन का गठन किया गया।

-2012 में रोहट क्षेत्र के 9 गांवों की भूमि अधिग्रहण के लिए चिन्हित।


जेपीएमआई के पहले चरण को विकसित करने की प्रक्रिया चल रही है। ले आउट प्लान और निजी खातेदारों की जमीन अवाप्ति के लिए भी काम चल रहा है।

-पीके गुप्ता, जीएम, रीको

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