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मगरमच्छ की जान पर खतरा, जवाई बांध में महज तीन फीट पानी, जरूरत दस फीट की

- जवाई बांध में साढ़े तीन सौ से अधिक मगरमच्छों के जीवन पर खतरा

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पाली

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Rajeev Dave

Apr 13, 2022

मगरमच्छ की जान पर खतरा, जवाई बांध में महज तीन फीट पानी, जरूरत दस फीट की

मगरमच्छ की जान पर खतरा, जवाई बांध में महज तीन फीट पानी, जरूरत दस फीट की

चैनराज भाटी/राजीव दवे
पाली। पश्चिचमी राजस्थान का सबसे बड़ा जवाई बांध पानी की कमी के कारण सूखा पड़ा है। इस बांध में रहने वाले साढ़े तीन सौ से अधिक मगरमच्छ, जो पानी के शैतान के नाम से जाने जाते है, उनकी जान पर खतरा आ गया है। यहां बांध में अब तीन फीट पानी ही बचा है। ये मगरमच्छ अब कम पानी के कारण बांध के किनारे आने लगे हैं। ये बिना पानी कब तक रह पाएंगे, इनको बचाने के लिए फिलहाल किसी के पास कोई योजना नहीं है। ऐसे में ये भगवान भरोसे है।

अभी डेड स्टोरेज में तलाश रहे जीवन
जवाई बांघ में फिलहाल डेड स्टोरेज का पानी ही है, इसमें से भी पङ्क्षम्पग कर रोजाना पानी निकाला जा रहा है। ये साढ़े तीन सौ मगरमच्छ डेड स्टोरेज के पानी में ही रहने को मजबूर है। अब इनको केवल मानसून की आस है।

दस फीट पानी कम से कम होना चाहिए
जवाई बांध में मार्स क्रॉकोडाइल प्रजाति के मगरमच्छ है, ये मीठे पानी में ही रहते है। इनकी लम्बाई छह से तेरह फीट होती है। इनकी उम्र करीब 70 से अस्सी साल रहती है। हालांकि यह मगरमच्छ बिना पानी के भी चार से छह महीने तक सुषुप्तावस्था में जाकर जीवित रह सकते हैं, लेकिन समय रहते बारिश नहीं हुई तो इन पर भारी संकट आ जाएगा। विशेषज्ञों की माने तो इनके लिए कम से कम दस फीट पानी रहना चाहिए, लेकिन जवाई बांध में फिलहाल तीन फीट पानी में ही ये रह रहे हैं, जो इनके साथ सीधा खिलवाड़ है।

बोले वन संरक्षक- कम पानी में रखना मजबूरी
यह सहीं है कि जवाई बांध में रहने वाले करीब साढ़े तीन सौ से अधिक मगरमच्छ वर्तमान में डेड स्टोरेज के तीन फीट पानी में ही रह रहे हैं। इनके लिए दस फीट तक पानी होना चाहिए, लेकिन पानी पीने के लिए दिया जा रहा है। सिर्फ मानसून से आस है। समय रहते बारिश नहीं हुई तो मगरमच्छ बचाने के लिए वॉटर ट्रेन से पानी लिया जाएगा। हालांकि ये मगरमच्छ बिना पानी के भी सुषुप्तावस्था में जाकर बिना हिले डूले चार से छह माह तक ङ्क्षजदा रह सकते हैं। जवाई बांध के बीच में पहाड़ों के खड्डों में घुस जाते है, जहां इनकी एनर्जी कम खर्च होती है। लेकिन मानसून में बारिश का होना जरूरी है। - पुष्पेन्द्र सिंह राजपुरोहित, वन संरक्षक, जवाई बांध एरिया, पाली।

खतरे में मगर...
मानसून की मेहरबानी नहीं होने से पश्चिम राजस्थान का सबसे बड़ा जवाई बांध सूखा पड़ा है। ऐसे में यहां के मगरमच्छों पर खतरा मंडरा रहा है। पानी की कमी के चलते ये मगरमच्छ बाहर का रूख कर रहे हैं।

फोटो : सुरेश हेमनानी
ड्रोन सहयोगी : उमेश चौधरी