15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

world teachers day: ऐसे माली जो सिंचते हैं इंसानी जीवन की बगिया

विश्व शिक्षक दिवस विशेष

2 min read
Google source verification

पाली

image

Rajeev Dave

Oct 05, 2023

world teachers day: ऐसे माली जो सिंचते हैं इंसानी जीवन की बगिया

world teachers day: ऐसे माली जो सिंचते हैं इंसानी जीवन की बगिया

शिक्षक दिवस यह पढ़ते या सुनते ही 5 सितम्बर का दिन जेहन में आता है, लेकिन विश्व शिक्षक दिवस भारत में मनाए जाने वाले शिक्षक दिवस से एक माह बाद 5 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस दिन को मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र की ओर से साल 1966 में यूनेस्को और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की बैठक की याद में की गई थी। जिसमें अध्यापकों की स्थिति पर चर्चा की गई थी। विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर यूनेस्को संगठन की तरफ से वर्ष 2023 का थीम कोविड-19 महामारी में बेहतरीन कार्य करने वाले शिक्षकों के लिए, शिक्षा का परिवर्तन शिक्षकों के साथ शुरू होता है... रखी गई है। ऐसे में हम आपको ऐसे शिक्षकों के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने कोविड महामारी में कार्य किया। वे ऐसी पौध तैयार करते हैं, जो सालों तक मानव सेवा को समर्पित रहती है।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर किया शोध
मेडिकल कॉलेज के सामुदायिक स्वास्थ्य विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. लतिका नाथ सिन्हा ने मातृ-शिशु स्वास्थ्य के साथ पल्स पोलियो टीकारण व किशोरी स्वास्थ्य पर शोध किया। वे शोध राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हुए। उन्होंने कोविड के समय कोन्टेक्ट ट्रेसिंग वॉर रूम में कार्य किया। मेडिकल कॉलेज में बायोमेडिकल रिसर्च विंग की स्थापना के साथ मेडिकल की संस्थागत आचार समिति को स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग दिल्ली में पंजीकृत कराने में भूमिका निभाई। कॉलेज की वैज्ञानिक समीक्षा समिति की सदस्य है।
बताते हैं शरीर के अंगों की क्रिया
मेडिकल कॉलेज के शरीर क्रिया विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अभिनव पुरोहित एमबीबीएस करने वाले विद्यार्थियों को मस्तिष्क, हृदय, लीवर के साथ शरीर के सभी भागों में होने वाली क्रियाओं का अध्ययन करवाते हैं। वे बताते है कि शरीर क्रिया विभाग महज अध्ययन करने व कराने वाला विभाग है। इससे जुड़े चिकित्सक जांच व उपचार नहीं करते हैं। पुरोहित पांच सौ से ज़्यादा कॉलेजों में संवाद कर चुके हैं। वे अभी योग के शरीर पर प्रभाव को लेकर शोध कर कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में योग लैब बनाने में भी सहयोग किया।
सिंगापुर व दक्षिण कोरिया में दी प्रस्तुति
मेडिकल कॉलेज के बायोकैमेस्ट्री विभाग की सह आचार्य डॉ. गरिमा गुप्ता दक्षिण कोरिया और सिंगापुर में कैंसर के मरीजों पर शोध प्रस्तुत कर चुकी है। उनका कार्य मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों को जेनेटिक डिसऑर्डर को समझाना, शरीर में किस हामोZन्स आदि से क्या बदलाव आते हैं, उपचार कैसे होता है आदि के बारे में बताती है। उनका कहना है कि मेडिकल में बायोकैमेस्ट्री के ज्ञान का होना जरूरी है। जांचों से बीमारियां का पता लगता है। उन्होेंने कोविड के समय लैब में जांच के साथ ओपीडी में आने वाले मरीजों की भी जांच की थी।