
मारवाड़-गोडवाड़ में बढ़ा किचन गार्डन का ट्रेंड, घर-आंगन में उगा रहे पौष्टिक फल-सब्जियां
-राजकमल व्यास
पाली। ये तीन उदाहरण इतना बताने के लिए काफी है कि मारवाड़-गोडवाड़ के लोग अब पोषण से कोई समझौता नहीं करते। सब्जियां व फल पौष्टिक मिले, इसके लिए गांव ही नहीं, शहरों में भी लोग किचन गार्डनिंग में रुचि लेने लगे हैं। जहां कुछ लोग निजी स्तर पर अपने घरों में हरा धनिया, पौदीना, हरी मिर्च, पालक सहित अन्य सब्जियों की पैदावार ले रहे हैं तो गांवों में कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रयासों से महिलाएं मेहनत कर खाली पड़ी भूमि में पोषण वाटिका के जरिए अपने परिवार के साथ ही गांव के लोगों को भी पोषण से भरपूर सब्जियां व फल मुहैया करवा पा रही हैं। इससे महिलाओं के घरों में उपयोग होने योग्य तो सब्जियों का उत्पादन हो ही रहा है, अतिरिक्त उत्पादन से वे आमदनी भी कर पा रही है।
ताजी व हरी सब्जियों से शरीर में रहती है स्फूर्ती
पोषाहार विशेषज्ञों की मानें तो प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 120 ग्राम फल एवं 300 ग्राम सब्जियों का सेवन करना चाहिए। इसमें 100 से150 ग्राम हरी पत्तेदार सब्जी, 75 से 100 ग्राम जड़-कंद मूल वाली सब्जियां तथा 75 से 100 ग्राम अन्य सब्जियां शामिल हैं। लेकिन, फल एवं सब्जियों की कम उपलब्धता एवं बढ़ती हुई महंगाई के कारण प्रति व्यक्ति अनुपात में फल एवं सब्जियों का सेवन नहीं कर पाते हैं। ऐसे माहौल में किचन गार्डनिंग यानी कि पोषण वाटिका पाली जिले में लोगों को पोषण प्रदान कर पा रही है। चिंता की बात ये भी है कि बाजार से खरीदकर लाई जाने वाली सब्जियों में अत्यधिक रासायनिक का उपयोग होता है, जबकि घर में उगानी जाने वाली सब्जियों व फलों में इसका खतरा नहीं रहता है।
सरकार कर रही जागरूक, केवीके ने महिलाओं को जोड़ा
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की ओर से वर्ष 2018 में नारी : ‘पोषण-संवेदी कृषि संसाधन एवं नवोन्मेषण’ नामक कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी, जिसके तहत पाली कृषि विज्ञान केन्द्र में भी कृषि को पोषण से जोडऩे तथा महिलाओं को पोषण बागवानी को बढ़ावा देने के प्रति जागरूक किया गया। ये प्रयासों का ही असर है कि पाली जिले के बोमादड़ा, गुरडाई, डेंडा, कूरणा एवं बाला सहित अन्य गांवों में 400 से भी अधिक पोषण वाटिकाएं संचालित हो रही है। ये पोषण वाटिकाएं गांवों में महिलाएं संचालित कर रही है, जिसके जरिए वे अपने घर के पास खाली पड़ी जमीन में टमाटर, मैथी, बैंगन, खीरा, मटर, पालक, चंदलिया, हरा धनिया, पुदीना सहित कई प्रकार की सब्जियों का उत्पादन कर पोषण युक्त भोजन कर पा रही है तो पपीता के जरिए आर्थिक आमदनी भी कर पा रही है।
केस एक : बोमादड़ा की कूकी घर में उगा रही सब्जियां
बोमादड़ा गांव की कूकी देवी अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई है। किचन गार्डनिंग से अनजान कूकी ने कृषि विज्ञान केन्द्र पाली से प्रशिक्षण लेने के बाद खुद ही सब्जियां उगानी शुरू कर दी। घर के पीछे खाली पड़ी भूमि पर कूकी वर्ष पर्यंन्त सब्जियां लेती रहती है, जो कि पूर्णतया जैविक है। वह अब तक टमाटर, मैथी, बैंगन, धनिया सहित कई प्रकार की सब्जियां उगा चुकी है। खास बात ये भी है कि घर के उपयोग आने के अतिरिक्त सब्जियों की बिक्री से उसे अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है। साथ ही परिवार को पौष्टिक सब्जियां भी मिल पा रही है।
केस दो : गुरड़ाई की उगिया रोजाना बना रही ताजा सब्जी
गुरड़ाई की उगिया देवी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उसने भी अपने घर के पास खाली पड़ी जमीन पर पोषण वाटिका विकसित कर दी। वैसे तो उगिया को इसका कोई ज्ञान नहीं था, लेकिन केवीके से पारंगत होने तथा केवीके के वैज्ञानिकों की तकनीक से आज ये घर में ही सब्जियों का उत्पादन कर पा रही है। अब उगिया को सब्जी खरीदने के लिए बाजार नहीं जाना पड़ता। साथ ही ये डर भी नहीं सताता कि सब्जियों में कोई हानिकारक रसायन होगा। वह एक साल में करीब 650 किलो तक सब्जी का उत्पादन कर चुकी है।
केस तीन : पाली के अनुपम ने घर में उगाए पपीता-संतरा
पाली शहर के पुराना हाउसिंग बोर्ड निवासी अनुपम शर्मा तो कोरोना काल से पहले से ही अपने घर में किचन गार्डनिंग कर रहे हैं। ये उनकी दिलचस्पी का ही असर है कि पूरा परिवार इस कार्य को लगाव से करता है। इनके घर में सब्जियों के लिए बाहर जाने की जरूरत ही नहीं रहती। यहां तक कि हरा धनिया और पुदीना भी ताजा तोडकऱ सब्जियों में डालते हैं, जिससे इनका भोजन पौष्टिक और स्वादिष्ट बन पड़ता है। इतना ही नहीं, अनुपम के परिवार ने तो अपने घर में मिर्ची, टमाटर और भिंडी के साथ ही संतरा, पपीता, अनार का पेड़ भी लगा रखा है।
केस चार : आंगनबाड़ी में बच्चों को मिल रही ताजा सब्जी
बोमादड़ा गांव की जेठी देवी यों तो आंगनबाड़ी सहायिका है, लेकिन इनकी रुचि का ही कमाल है कि इन्होंने अपने घर के पीछे ही पोषण वाटिका विकसित कर दी। इससे अपने घर के लिए पर्याप्त सब्जियों का तो उत्पादन किया ही, आंगनबाड़ी परिसर में भी सफल पोषण वाटिका स्थापित कर दी। इन वाटिकाओं में मौसम के अनुरूप सब्जियों का तो उत्पादन होता ही है। अनार, चीकू, जामुन, अमरुद व बेर के साथ ही नींबू, ग्वारपाठा, गिलोय, सेंजना सरीखे औषधीय पौधे भी लगा रखे हैं। खास बात ये है कि आंगनबाड़ी केन्द्र में बच्चों को भी ताजा फल व सब्जियां मिल पा रहे हैं। इससे उनके पोषण में भी सुधार हो रहा है।
कीटनाशक का नहीं खतरा
केवीके के प्रयासों से पोषण वाटिका के प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। इससे सब्जियों में कीटनाशक का खतरा नहीं रहता, साथ ही परिवार के सदस्यों को दैनिक आहार में हरी सब्जियां, जड़-कंद एवं आहार वाली सब्जियां मिल जाती है। इससे घर का माहौल भी सुकून भरा बना रहता है। -डॉ. धीरजसिंह, अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केन्द्र, काजरी पाली
किचन गार्डनिंग से बढ़ रहा पोषण
पोषण वाटिका के जरिए वर्ष पर्यन्त मौसमी फल एवं सब्जियों की उपलब्धता संभव है। किचन गार्डनिंग से पिछले कुछ समय में जिले के काफी गांवों की महिलाओं को जोड़ा है। इससे उन्हें ताजा सब्जियां व फल मुहैया हो पा रही है। इससे शरीर को पर्याप्त पोषण के साथ ही प्रचूर मात्रा मेें विटामिन भी मिल पाते हैं। -डॉ. ऐश्वर्या डूडी, विषय विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केन्द्र काजरी, पाली
Published on:
15 Dec 2021 04:24 pm
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