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मोदी के डिजीटल इंडिया प्रोजेक्ट में हमारी शहरी सरकार की कछुआ चाल

- शहरवासियों को सभी जानकारी देने के लिए  

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digital india

पाली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रत्येक विजन में कंधा से कंधा मिलाकर चलने का दावा करने वाली हमारी शहरी सरकार एक प्रोजेक्ट में पिछड़ती जा रही है। स्वच्छ भारत मिशन में अव्वल आने के लिए जहां तमाम कोशिशें की गई वहीं केन्द्र सरकार के दूसरे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट डिजीटल इंडिया में फिसड्डी साबित हो रही है। करीब दो साल पहले डिजीटल प्रोजेक्ट और पारदर्शी सरकार का हवाला देते हुए जो वेबसाइट विकसित की गई वह पिछले काफी समय से उपेक्षित है।
हम बात कर रहे हैं नगर परिषद की सरकारी वेबसाइट की। जिसको विकसित करने के बाद संचालन का ठेका भी दिया गया था, लेकिन इसकी कई जानकारियां कई माह से अपडेट ही नहीं हुई है। हालात यह है कि वेबसाइट का होम पेज 8 नवम्बर 2017 के बाद अपडेट नहीं हैं। अलग-अलग वेबपेज 2016 के बाद से ही अपडेट नहीं है। जबकि वेबसाइट को अब तक 12 लाख 97 हजार से अधिक लोग देख चुके हैं।

दिसम्बर तक था संचालन का ठेका

इस वेबसाइट को जिस फर्म ने बनाया था उसी के पास दिसम्बर 2017 तक संचालन का ठेका था। लेकिन इसके बाद वेबसाइट के कई वेबपेज एक साल पहले तक अपडेट नहीं हैं। शिकायत और फीडबैक का पेज 21 अप्रेल 2016 को लास्ट अपडेट है। बजट भी 2017-18 के बाद अपडेट नहीं किया गया।

उपलब्धियां बताने का काम हो रहा है

शहर में अपनी उपलब्धियां गिनाने के लिए ई-न्यूज लेटर और कार्यक्रम के फोटो जरूर अपडेट हो रहे हैं। इसके अलावा आमजन को लाभांवित करने वाली योजनाएं तक अपडेट नहीं है।

पारदर्शी बनाने के लिए अपडेट करने होते हैं टैंडर

शहर में होने वाले विकास एवं निर्माण कार्य में पारदर्शिता रखने के लिए टैंडर और निविदाओं की सूचना भी सार्वजनिक करनी होती है। लेकिन नगर परिषद की वेबसाइट पर निविदाओं की सूचना जून 2017 के बाद से ही अपडेट नहीं है।

इनका कहना...

वेबसाइट के बारे में जानकारी लेते हैं। पहले वेबसाइट रखरखाव के लिए भुगतान होता था, इस बारे में भी जानकारी जुटा कर कार्रवाई करेंगे।

- इंद्रसिंह राठौड़, आयुक्त, नगर परिषद पाली।