
पाली. शहर के विकास और 20 साल आगे की सोच रख कर मास्टर प्लान बनाने की कवायद तीन साल पहले शुरू की गई थी। तब शहरी सरकार एक थी, लेकिन अब पिछले तीन साल से यूआईटी भी काम कर रही है। एेसे में दो शहरी सरकारों को मिलकर विकास का एक खाका तैयार करवाना है। बताया जाता है कि नया मास्टर प्लान 2035 तक बनना है। लेकिन दोनों शहरी निकाय मिलकर भी राशि नहीं दे पाई है।
राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी के पत्र को याचिका मानते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय मास्टर प्लान के अनुसार सभी शहरों में कार्य करवाने पर जोर दे रहा है। कई गाइड लाइन भी जारी की है। मुख्य सचिव से लेकर कई नगरीय निकायों के अधिकारियों को तलब किया गया है। इधर, पाली में हालात यह है कि यहां नए मास्टर प्लान बनाने का कार्य कागजों पर भी उतर नहीं पाया है। कारण कंसल्टिंग फर्म की बकाया राशि होना है। दोनों नगरीय निकाय एक-दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे हैं और मास्टर प्लान में उतनी ही देरी हो रही है।
यह है मास्टर प्लान के बारे में
वर्तमान में जो मास्टर प्लान चल रहा है वह 2005 में बना है और 2023 के हिसाब से है। लेकिन तीन साल पहले यूआईटी नया नगरीय निकाय बना और कुछ गांवों को यूआईटी के अधीन कर दिया गया। इसके बाद 2015 को बेस बनाते हुए 2035 तक का मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके लिए 17 लाख की राशि कंसल्टिंग फर्म को चुकानी है। लेकिन, दोनों निकायों के बीच यह राशि फंस कर रह गई है।
इधर, हाईकोर्ट की सख्ती
इस मामले में सुनवाई करते हुए 4 माह पहले हाईकोर्ट ने मास्टर प्लान की पालना की रिपोर्ट मांगी थी। चार माह बाद पालना नहीं होने पर अब 29 मई को सख्ती दिखाते हुए अधिकारियों को तलब किया है। एेसे में नियमन की पूरी प्रक्रिया रोक दी है।
यूआईटी तो अस्तित्व में ही नहीं थी
जब मास्टर प्लान की बात आई थी तो यूआईटी अस्तित्व में नहीं थी। हमने लिख कर दे दिया है। जो भुगतान है वह यूआईटी नहीं करेगी।
- डॉ. बजरंगसिंह, सचिव, यूआईटी पाली
भुगतान के बारे में पता करवाते हैं
मास्टर प्लान का यह मामला मेरी जानकारी में नहीं है। कितनी राशि का भुगतान है और किसको यह भुगतान करना है। यह मैं पता करवाता हूं
- इंद्रसिंह राठौड़, आयुक्त, नगर परिषद पाली।
Published on:
26 May 2017 10:33 am
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