सोजतरोड। तबला, हार्मोनियम व मृदंग पर उसकी अंगुलियों के जादू से जहां सुरीला सुर निकलता है तो राग भैरवी, चंद्रकोष, सारंग व मल्हार की राग की तान छेड़ते ही चारों ओर एक अलग ही नशा छा जाता है। हम बात कर रहे हैं सोजतरोड की बेटी हर्षिता सोलंकी की, जो आज शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में अलग ही छाप छोड़ रही है। बकौल हर्षिता, ‘मेरी गायन कला के सपनों को पंख देने वाला राजस्थान पत्रिका ही है, जब 8 सितम्बर 2010 में राजस्थान पत्रिका के गोल्डन वॉइस कार्यक्रम में भाग लेकर जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया था।
उसके बाद से ही मेरी रुचि गायन क्षेत्र में बढ़ गई।’ शांतिलाल रावल से तबले, हार्मोनियम, मृदंग व शास्त्रीय गायन की शिक्षा लेने वाली हर्षिता वर्तमान में एसडी कॉलेज ब्यावर में द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत है। हरफूलसिंह रावणा राजपूत की पुत्री हर्षिता ने पत्रिका के गोल्डन वॉयस कार्यक्रम के बाद 2014 में राइजिंग स्टार जोधपुर में भाग लिया, जिसमें वह प्रथम रनरअप रही। फिर 19 जुलाई 2015 में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा की ओर से आयोजित एकल गायन में द्वितीय रही। 11 सितम्बर 2016 में कलाकार पाली प्रतियोगिता में फाइनलिस्ट रही, तो 2017 में सोजत गॉट टेलेंट में फाइनलिस्ट रही।
2017 में लगन उदयपुर में फाइनलिस्ट प्रथम रनर तथा 2017 में बिग डांस एन्ड सिंगिंग सुपर स्टार में प्रथम रही। लगातार उपलब्धियां प्राप्त कर रही हर्षिता विधानसभा अध्यक्ष से सम्मानित हो चुकी है। ये 2019 में युवा सांस्कृतिक प्रतिभा खोज महोत्सव जोधपुर में शास्त्रीय गायन में स भाग स्तर पर प्रथम रही तो कला रत्न पुरस्कार के लिए राज्य स्तर पर चयनित हो चुकी है। इतना ही नहीं, श्रीश्री रविशंकर की ओर से आयोजित संगीत आयोजन दिल्ली में भी प्रतिभा दिखाई। हर्षिता का संगीत के प्रति लगाव ही है कि वह हर सप्ताह अपने पिता के साथ खाखरा स्कूल जाती है और बच्चों को रियाज करवाती है।
शास्त्रीय संगीत के राग में निपुण
हर्षिता शास्त्रीय संगीत की रागों का अध्ययन व गायन करने में निपुण है। वह यमन, यमन कल्याण, राग भैरवी, चन्द्रकोष, सारंग, मल्हार, भुपाली, अहल्या बिलावल, देश, काफी, बिहाग सहित कई रागों को गाती है। वही तबले में भी रूपक, छपताल, एक ताल, चार ताल (चौताल), दीपचंद, पंजाबी, धमार, सक्तताल, फिरोदस, ब्रह्मताल, रुद्रताल, लक्ष्मीताल में निपुण है।
ग्रामीण क्षेत्र में गायन कला के विकास की मंशा
प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद की ओर से संगीत प्रभाकर व संगीत विशारद की योग्यता ले चुकी हर्षिता शास्त्रीय संगीत में पीएचडी कर ग्रामीण बाहुलय क्षेत्रों में गायन की कला का विकास कर चाहती है। वह चाहती है कि युवा भी इससे प्रेरित हो। कारण कि संगीत ही एकमात्र माध्यम है जो मन को एकाग्रचित कर बुद्धि को विकसित करता है।