
रमेश शर्मा की रिपोर्ट
पाली। मारवाड़ जंक्शन कस्बा, जो 136 साल पहले 24 जून 1882 को जंक्शन बन गया था। राजपुताना स्टेट के समय अजमेर से अहमदाबाद लाइन बिछने के बाद मारवाड़ से पाली और फिर जोधपुर तक मीटरगेज का ट्रेक बिछने के बाद यह मारवाड़ का यह गांव जंक्शन से विभूषित है और पाली जिले का एकमात्र जंक्शन। लेकिन है आज भी किसी गांव सरीखा ही। इसी के नाम से है मारवाड़ जंक्शन विधानसभा। जन का मन टटोलने जब मैं इस कस्बे में पहुंचा तो इस कस्बे से गुजरते हुए दो जगह जाम से जूझना पड़ा। एक तो संकड़ा बाजार तिसपर जाम बड़ी खीज पैदा कर देता है। मजे की बात ये है कि इस जाम की दुश्वारियों के बावजूद यहां के लोगों के चेहरे पर यूं कोई शिकन नहीं दिखती। जैसे ही आप इसकी बात छेड़ों मानो इनके जख्म हरे हो जाते हैं।
कहने को यहां उपखण्ड कार्यालय है। जाहिर है तकरीबन 250 गांव के लोगों का वास्ता यहां से पड़ता होगा और वे यहां आते जाते भी हैं। इस कस्बे में आने जाने वाला हर व्यक्ति इस जाम से वाबस्ता होता है। उनके लिए कस्बे में आना और वापस लौटना किसी विकट परीक्षा से कम नहीं है। जाम के दौरान ही हमने जब कुछ लोगों से बात की। एक बुजुर्ग मोहम्मद खान पठान बोले, मेरे बचपन से बुढ़ापे तक ये समस्या ज्यों की त्यों है। साल दर साल आबादी और वाहन बढ़ते ही जा रहे हैं पर इसका हल किसी जनप्रतिनिधि के पास नहीं दिख रहा। वे बताते हैं उनका जन्म आजादी से पहले हो गया और कई साल पहले भू अभिलेख निरीक्षक पद से सेवानिवृत्त भी हो गए। मुख्य बाजार के बीच दो-दो रेलवे फाटक इनके बीच दुकानदार कैसे अपना व्यापार कर पाते होंगे। एक व्यापारी सेंऊमल मनसुखानी बताते हैं यहां तो बरसों से इसी तरह चल रही है जिंदगी। अब तो ये रोज की बात हो गई है।
इसी जाम के बीच कुछ लोग खरीददारी कर लेते हैं। उनसे अन्य मुद्दों पर बात करने पर कहते हैं पानी, बिजली, सडक़ किसी भी क्षेत्र में बात कर लो हमारे क्षेत्र की सबसे बुरी स्थिति है। सडक़ें तो जैसे हैं ही नहीं। आप कस्बे या आसपास के गांवों की तरफ निकल जाएं तो इस वास्तविकता से आप भी रूबरू हो सकते हैं। इस दौरान मु य बाजार में चाय की थड़ी पर जमे कुछ लोगों से चर्चा शुरू की तो बकौल राकेश खींची बमुश्किल चार किलोमीटर की परिधि में फैले इस कस्बे में एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में एक घंटा लग जाता है। इतनी ही देर में यहां के लोग चालीस किलोमीटर दूर पाली तक पहुंच जाते हैं। खीजकर कहते हैं अस्पताल में आज तक कोई महिला चिकित्सक नहीं लगाई गई। प्रसव के लिए महिलाओं को पाली या जोधपुर ले जाना पड़ता है। यूं तो भाजपा से ही जुड़ा हूं लेकिन समस्याओं का हल नहीं होता तो खिन्नता होती है। वहीं साथ ही बैठे महावीर सिंह से चर्चा शुरू की तो वह सरकार और विधायक दोनों के काम से संतुष्ट नजर आए। उनसे सडक़ों के हाल और जलापूर्ति पर सवाल किया तो बोले हां कुछ कमियां तो सभी जगह रह जाती हैं।
साथ बैठे रणवीर सिंह उनकी बात काटते हुए कहते हैं। इन पांच साल में कस्बे से लेकर केन्द्र तक हर कड़ी से कड़ी जुड़ी हुई थी। जो भी काम होने थे अभी होने थे। अभी नहीं होते तो कब होंगे। वह उल्टा सवाल दागते हैं क्या हमारी इस वेदना को कोई समझ भी पाएगा? महावीर सिंह और रणवीर सिंह राजावत बताते हैं दिनभर में पैसेंजर और मालगाडिय़ां दोनों मिलाकर करीब सत्तर से अधिक गाडिय़ां यहां से गुजरती हैं। थोड़ी थोड़ी देर में फाटक लग जाता है। यहीं पास की दुकान पर कपड़ों पर इस्त्री कर रही किरण ने वार्तालाप को सुन कर अपनी राय दी कि कस्बे में पानी की बहुत समस्या है। कभी कभी सात दिन में पानी आता है। यातायात के साथ सडक़, नाली की समस्या से सभी त्रस्त हैं। उनकी बेटी नेहा एमए कर रही हैं। कॉलेज के लिए नियमित पाली जाती हैं। वह बोली हमारे यहां इसी साल कॉलेज खुला है। मुझे तो पाली ही जाना पड़ा, लेकिन यातायात और आवागमन के साधनों का इतना अभाव है कि कई बार सरकारों पर गुस्सा आता है। परीक्षा के दिनों में सुबह सात बजे पाली के कॉलेज पहुंचना है तो हमें निजी साधन से ही जाना होगा।
क्षेत्र के मुद्दे
-ग्रामीण इलाकों में परिवहन व्यवस्था चरमराई हुई है।
-उपखण्ड में पेयजल की किल्लत एवं गांवों को जवाई जल परियोजना से जोडऩे की दरकार।
-उपखण्ड मु यालय पर महिला चिकित्सक नहीं होने से हजारों लोग प्रभावित। यहां 100 बेड वाले अस्पताल की जरूरत।
-बहुत पुराना और महत्वपूर्ण कस्बा होने पर भी मारवाड़ जंक्शन में नगरपालिका नहीं।
-किसानों को फसलों का मूल्य उचित दिलाने के लिए खरीद केन्द्र की स्थापना की जानी चाहिए।
-रोजगार के साधन नहीं इसलिए पलायन। औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाने चाहिए।
-उपखण्ड मु यालय पर फायर स्टेशन बनाया जाना चाहिए।
-रीको का कार्यालय होना चाहिए। मारवाड़ क्षेत्र को मगरा क्षेत्र घोषित कर विशेष सुविधा दी जानी चाहिए।