सादड़ी। विश्ववि यात राणकपुर जैन मन्दिर के अवलोकनार्थ आने वाले देशी विदेशी सैलानी अब कुम्भलगढ वन्यजीव अभयारण्य वनक्षेत्र प्रकृति व पर्यावरण भ्रमण व इसमें निवासित वन्यजीवों की अठखेलियों का निकटता से लुत्फ उठा पाएंगे। इसके लिए अरण्य वन क्षेत्र में दो ट्रेक पर सफारी सेवा की विधिवत शुरूआत अरण्य सादडी रैन्ज सहायक वनसंरक्षक यादवेन्द्रसिंह चूण्ड़ावत, रैन्जर रवि नामा व समाजसेवी गोविन्दप्रसाद व्यास ने हरी झण्डी दिखा कर मुछाला महावीर-राणकपुर टे्रक पर सफारी वाहन को रवाना किया।
विदेशी सैलानियों ने इसका लुत्फ उठाया
सफारी सेवा शुरू होने के पहले दिन कई देशी विदेशी सैलानियों ने इसका लुत्फ उठाया। ज्ञात रहे यह सफारी सेवा जुलाई माह से 30 सितम्बर तक मानसून के दौरान बन्द रही। कुम्भलगढ़ अभयारण्य की चारों रैन्जमें पर्यटन दृष्टि व वन, वन सम्पदा व वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर बनाये वन पथ पर्यटकों के विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा है। अरण्य की चारों रैन्ज में ऐसे प्राकृतिक वन पथ हैं, जिसमें बोखाड़ा कुम्भलगढ़ सादडी रेन्ज संयुक्त सीमा वाला राणकपुर मालगढ़ से राणाकाकर ऐतिहासिक स्थल राणकपुर व कु भलगढ़ दुर्ग का महज 25 किमी सफर में एक साथ अवलोकन करवाता है। सादडी रैन्ज में राणकपुर से राजपुरा जोबा, मुछाला महावीर 14 किमी सफर वाले यह वनपथसैलानियों की मनपसन्द बने हुए हैं।
यहां वन्यजीव सहज दिखाई दे जाते हैं
एएसएफ यादवेन्द्रसिंह चूण्डावत ने बताया कि अभयारण्य की सभी रैन्ज में ऐसे कई पर्यटन उपयोग वनपथ है। इनकी सफारी से अरण्य वन सम्पदा, वन्यजीवों की अठखेलियों एवं प्रकृति पर्यावरण के नयनाभिराम नजारे को निकटता से अवलोकन किया जा सकेगा। अरण्य सहायक वन संरक्षक वाई.एस.चूण्डावत, रैन्जर रवि कुमार, वनपाल वरदाराम मेघवाल, अन्तर कंवर, सुनिल कुमार ने सफारी वाहन को विधिवत हरी झण्ड़ी दिखाकर रवाना किया।