शहर से महज 20 किमी दूर स्थित गांवों में भी नहीं घरों तक नहीं पहुंचा पानी। घर-घर कनेक्शन का ग्रामीण कर रहे इंतजार।
जब हम छोटे थे तो मां व दादी सिर पर मटकी व हाथ में डोली लेकर कुएं पर जाती। वहां से मटकी में पानी भरकर लाती। आज हम चांद पर पहुंच गए हैं, लेकिन हमारे गांवों में आज भी तपती धूप में मां, दादी सिर पर मटकी रखकर ही पानी लाकर प्यास बुझाती हैं। यह हालात तब है जब जल मिशन के तहत हर घर नल, हर घर जल का नारा दिया गया है। उस पर राजस्थान को 30 हजार करोड़ रुपए देने का दावा किया जा रहा है।
दूसरी तरफ गांव सरदारसमंद बांध के पास बसा है, लेकिन बांध का पानी खारा होने के कारण उसका उपयोग पेयजल के रूप में नहीं कर पाते हैं। पाली जिला मुख्यालय से महज 20 किमी की दूरी पर बसा है करीब तीन हजार की आबादी वाला सरदारसमंद गांव। इस गांव में जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल कनेक्शन देने का कार्य शुरू हुआ। पानी का उच्च जलाशय बना दिया गया। घरों में कनेक्शन देना तो दूर अभी तक गांव में पाइप लाइन बिछाने का कार्य भी पूरा नहीं हुआ है। ग्रामीणों को गांव में बनी एक मात्र टंकी से पानी लेने जाना पड़ता है। वह भी झाड़ियों से घिरी है।
टांके की नहीं सफाई, ढक्कन भी खुला
गांव में बनी पानी की टंकी से पानी भरने के लिए लगे नल झाड़ियों से घिरे है। नल खराब है। ऐसे में उसके पास बने टांके में पानी भरा जाता है। उसकी सफाई तक नहीं की जाती है। टांके के ढक्कन टूटे है। इस टांके से ही ग्रामीण डोली से पानी निकलते हैं।
पानी का नहीं प्रबंध
गांव में पानी का कोई प्रबंध नहीं है। यहां बने एक मात्र टांके से ही पानी भरकर ले जाना पड़ता है। टांके में पानी नहीं होने पर नवी ढाणी के पास नाडी से पानी लाते हैं। पाइप लाइन का कार्य एक साल से चल रहा है। -खेताराम, ग्रामीण
मंगवाने पड़ते हैं टैंकर
गांव में पानी टांके में आता है। पानी की अधिक जरूरत होने पर टैंकर मंगवाने पड़ते हैं। गांव में पाइप लाइन बिछाने का काम तो पूरा नहीं हुआ है। टंकी तो छह-सात माह पहले बन गई थी। -मादाराम, ग्रामीण
झीतड़ा से करते हैं जलाूपर्ति
सरदारसमंद गांव में झीतड़ा गांव से जलापूर्ति की जाती है। वहां से पानी को टंकी में भरा जाता है। उसी से ग्रामीण पानी ले जाते है। मैं जब वहां पांच माह पहले गया था तो टंकी पर नल लगे थे। -सुदर्शन दयाल, सहायक अभियंता, जलदाय विभाग, सोजत