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जीवन भोजन के लिए नहीं, भोजन जीवन के लिए- आचार्य महाश्रमण

आनन्द वाटिका में धवल सेना ने किया विश्राम

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पाली

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Suresh Hemnani

Dec 17, 2022

जीवन भोजन के लिए नहीं, भोजन जीवन के लिए- आचार्य महाश्रमण

जीवन भोजन के लिए नहीं, भोजन जीवन के लिए- आचार्य महाश्रमण

पाली/रोहट। तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमण शनिवार सुबह पाली से विहार कर खारड़ा की आनन्द वाटिका पहुंचे। श्रावक-श्राविकाओं ने आचार्य व संत-साध्वियों से आशीर्वाद लिया।

आनन्द वाटिका में प्रवचन करते हुए आचार्य महाश्रमण ने कहा कि जैन शास्त्र में बताया गया है कि शरीर का क्यों टीका रखे। पाप कर्मों का नाश करने के लिए शरीर मिला है। शरीर ही धर्म साधना का कारण है। शरीर ठीक रहेगा तो यात्राएं होगी।धर्म प्रचार का कार्य शरीर सही होने पर ही अच्छा हो सकता है। धर्म की साधना शरीर से ही की जा सकती है। यदि शरीर काम नहीं कर रहा है तो लम्बा जीवन जीने का कोई महत्व नहीं है। उन्होंने कहा कि जीवन भोजन के लिए नहीं, भोजन जीवन के लिए है। स्वाद के लिए खाना उत्तम नहीं है।

चातुर्मास की विनती
प्रवचन में रोटी बैंक अध्यक्ष आनन्द कवाड ने आचार्य महाश्रमण से वर्ष 2027 का चार्तुमास पाली में करने की विनती की। इस दौरान तेरापंथ सभा अध्यक्ष सुरेन्द्र सालेचा, प्रमोद भंसाली, पीयूष गोगड, रमेश मरलेचा, वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ के सज्जन गुलेच्छा, पदम ललवानी, सम्पत तातेड़, महेश बोहरा, मांगीलाल बोहरा, नगर परिषद सभापति रेखा भाटी, राकेश भाटी, पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड, एक्सईएन मनीष, एईएन राकेश, रोटी बैंक के लखपाल भंडारी, नन्दूभाई, जितेन्द्र, महावीर बोकडिया, चंदू मेहता, गंगाराम, रोहट प्रधान सुनिता कंवर राजपुरोहित, महावीर सिंह राजपुरोहित, भाकरीवाला सरपंच अमराराम बेनीवाल, चामुण्ड सिंह भाकरीवाला, व्यापार मंडल अध्यक्ष वीरम गुर्जर, पंकज बंसल, थानाधिकारी उदय सिंह मौजूद रहे।

गीत से किया सत्कार
आनन्द वाटिका में आचार्य महाश्रमण का महिलाओं ने गीत गाकर सत्कार किया। प्रवचन से पहले आचार्य ने नवकार मंत्र का श्रवण कराया। श्रावक-श्राविकाओं को भी नवकार मंत्र का उच्चारण करवाया।

कल रोहट को करेंगे पावन
आचार्य महाश्रमण रविवार सुबह आनन्द वाटिका से विहार करके रोहट में जालोर चौराहा पर जैनाचार्य सर्कल पर पहुंचेंगे। वहां से मुख्य बाजार होते हुए आदर्श विद्या मंदिर में पहुंचेंगे। स्कूल में प्रवचन होगा। आचार्य व धवल सेना रात्रि विश्राम रोहट में ही करेंगे। आचार्य महाश्रमण रोहट में करीब 50 वर्ष बाद पधार रहे है। इससे ग्रामीणों में उत्साह है।