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auspicious moment : जून में कब है, विवाह के शुभ मुहूर्त पढें पूरी खबर

auspicious moment : इस महीने के आगाज के साथ ही शादी-ब्याह का धूम-धड़ाका शुरू हो गया है

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पाली

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Rajkamal Vyas

Jun 06, 2023

auspicious moment : जून में कब है, विवाह के शुभ मुहूर्त पढें पूरी खबर

auspicious moment : जून में कब है, विवाह के शुभ मुहूर्त पढें पूरी खबर

auspicious moment : जून इस महीने के आगाज के साथ ही शादी-ब्याह का धूम-धड़ाका शुरू हो गया है। शहनाइयों की गूंज के बीच मारवाड़-गोडवाड़ के युगल हमसफर बनेंगे। वहीं मार्केट में भी रौनक देखने को मिल रही है। इसकी रंगत अभी से नजर आने लगी है। शादी वाले घरों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। होटल, पांडाल व भवन बुक हो चुके हैं तो हलवाइयों के साथ ही बैंडवादक, घोड़ी, रथ व वाहन की बुकिंग भी करवाई जा चुकी हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जून में इस बार सबसे ज्यादा विवाह के मुहूर्त है। इसमें अबूझ मुहूर्त कहे जाने वाली भड़ली नवमी भी शामिल है। अक्षय तृतीया के बाद साल का दूसरा अबूझ मुहूर्त भड़ली नवमी 27 जून को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन उन लोगों के विवाह भी हो सकेंगे, जिनके लिए विवाह मुहूर्त इस साल नहीं बन रहे हैं। इसके अलावा किसी की कुंडली में राहु-केतु या मंगल बाधा रहती है, उनके लिए भड़ली नवमी का मुहूर्त श्रेष्ठ माना गया है।

देवशयनी एकादशी 29 को

पंडित कुशाल दवे ने बताया कि इस महीने का आखिरी विवाह मुहूर्त 28 जून को होगा। अगले दिन 29 जून को देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु संसार का कार्यभार भगवान शिव को सौंप कर योग निद्रा में चले जाएंगे। इसके बाद समस्त मांगलिक आयोजनों पर विराम लग जाएगा। शास्त्रों के अनुसार मांगलिक कार्यों के लिए भगवान विष्णु का जागृत रहना जरूरी है। इस साल दो सावन रहेंगे, जिसके चलते पांच महीने तक भगवान विष्णु शयन में रहेंगे।

कुछ तो लगातार मुहूर्त

पांच जून से 28 जून तक शादी के कई शुभ मुहूर्त है। कुछ मुहूर्त तो लगातार तारीखों में पड़ रहे हैं। पंचाग के अनुसार इस माह के पहले सप्ताह में पांच से सात जून तक लगातार मुहूर्त है। इसके बाद 11 से 12, 22, व 23 से 27 जून तक मांगलिक आयोजनों के शुभ मुहूर्त रहेंगे।

आषाढ़ महीने की शुरुआत

चार जून को स्नानदान पूर्णिमा वट सावित्री पूजन का समापन हुआ। इसी के साथ पांच जून से आषाढ़ महीने की शुरुआत हो गई। इस दौरान प्रकृति पूजन का विधान है। पेड़-पौधों के पूजन के साथ उन्हें रोपने से बाधाओं का क्षरण होता है, ग्रहों की नकारात्मकता खत्म होकर उनका अनुकूल प्रभाव पड़ता है।