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Lab under investigation: जांच में किया गडबड़झाला, बनाई फेक रिपोर्ट

जांच के घेरे में लैबबांगड़ चिकित्सालय में पीपीपी मोड पर हुई जांचों में फेक रिपोर्टअस्पताल प्रशासन को संदेह हुआ तो बैठाई जांच, रिपोर्ट का इंतजार

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पाली

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Rajeev Dave

Sep 25, 2023

Lab under investigation: जांच में किया गडबड़झाला, बनाई फेक रिपोर्ट

Lab under investigation: जांच में किया गडबड़झाला, बनाई फेक रिपोर्ट

बांगड़ मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में मरीजों को सुविधा देने के लिए पीपीपी मोड पर सीटी स्कैन व लैब में जांच करवाने में गड़बड़ी के अंदेशे पर अस्पताल प्रशासन की ओर से जांच कमेटी बनाई गई। इसके साथ सीटी स्कैन करने वाली एजेंसी पर पांच लाख का जुर्माना लगाने के साथ एक माह का भुगतान का भी रोक लिया गया था।
अस्पताल में फरवरी में 128 स्लाइस की सीटी स्कैन मशीन पीपीपी मोड पर लगाई गई थी। उससे पहले अस्पताल में लगी सीटी स्कैन मशीन पर 10-12 सीटी स्कैन होती थी। यह आंकड़ा अचानक बढ़कर 50 तक पहुंच गया। सीटी स्कैन करने वाले जूनियर रेजिडेंट से ही सीटी स्कैन लिखवाकर कर देते। सीटी स्कैन में चिकित्सक की ओर से एक जगह की सीटी स्कैन लिखने पर की तो वहीं जाती थी, लेकिन पर्ची पर उसके साथ एक-दो अन्य शरीर के अंगों की सीटी स्कैन लिखकर बिल पेश कर दिए गए। इस पर अस्पताल प्रशासन ने जांच करवाई तो गड़बड़ी सामने आई। इस पर अब सीटी स्कैन लिखने वाले चिकित्सक को पर्ची पर हस्ताक्षर करने के साथ सील लगाने को कह दिया गया है। उस पर विभागाध्यक्ष या अस्पताल अधीक्षक के भी हस्ताक्षर कराने पर सीटी स्कैन करवाई जा रही है।
लैब जांच में बिल ही नहीं
पीपीपी मोड पर चलाई गई लैब जांच में जोधपुर में जांच कराने का कहकर बिल बना दिए गए। जब अस्पताल प्रशासन की ओर से जोधपुर में जांच करने वाली लैब व अस्पताल के बिल मांगे गए तो संतुष्टीपूर्ण जवाब नहीं मिला। इस पर अस्पताल प्रशासन ने इसकी जांच के लिए कमेटी बनाई। जिसकी जांच रिपोर्ट अभी तक मिली नहीं है।
आउटडोर तो बढ़ा नहीं
अस्पताल में सीटी स्कैन व लैब जांच कराने वालों की संख्या बढ़ने पर शक का कारण बने आउटडोर के मरीज। सीटी स्कैन लगने के बाद आउटडोर के मरीजों में अधिक इजाफा नहीं हुआ, लेकिन सीटी स्कैन कराने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई। जोधपुर में होने वाले जांच भी बढ़ गई।
बिल बन रहा था अधिक
अस्पताल में सीटी स्कैन करने में गड़बड़ी मिली थी। एजेंसी पर अप्रेल में ही जुर्माना लगाने के साथ भुगतान रोका। अब सीटी स्कैन पर अधिकारियों के हस्ताक्षर व पूरा डाइग्नोस कराने के बाद ही करवा रहे हैं तो उसकी संख्या वापस 25 के आसपास आ गई है। लैब में गड़बड़ी की जांच चल रही है।
डॉ. दीपक वर्मा, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज, पाली