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World Milk Day: गाय और भैंस का दूध बना रोजगार का नया साधन, राजस्थान के इस जिले में 6 लाख 90 हजार से ज्यादा गाय-भैंस

गाय या भैंस पहले हर घर में पाली जाती थी। समय बदला तो इनका पालन कुछ घरों या कहे पशुपालकों तक सीमित हो गया, लेकिन अब गाय व भैंस पालन उद्योग के रूप में विकसित हो रहा है।

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पाली

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Akshita Deora

Jun 01, 2024

गाय या भैंस पहले हर घर में पाली जाती थी। समय बदला तो इनका पालन कुछ घरों या कहे पशुपालकों तक सीमित हो गया, लेकिन अब गाय व भैंस पालन उद्योग के रूप में विकसित हो रहा है। युवा गाय-भैंस का पालन कर डेयरी उद्योग चला रहा है। जिसके दो उदाहरण बताए गए है। पाली जिले में 6 लाख 90 हजार 678 गाय व भैंस है। जिनसे रोजाना करीब 6 लाख लीटर से दूध का उत्पादन होता है। जो घर-घर पहुंचता है। एक लीटर दूध की कीमत भी 50 से 100 रुपए तक मिल रही है। जिसका अर्थ यह है कि यदि एक गाय रोजाना चार लीटर दूध देती है तो कम से कम 200 रुपए का दूध होता है।

आंकड़ों से समझे दूध व मवेशियों की स्थिति

● 3,60,871 गोवंश है जिले में
● 3,29,807 भैंसवंश है जिले में
● 6 लाख लीटर करीब दूध उत्पादन होता है रोजाना

केस 1

हेमावास गांव के रहने वाले हितेश कपड़े की ट्रेडिंग करते थे। इसके बाद विचार आया कि गाय का पालन किया जाए। एक गाय लाए और उसका पालन किया। आज उनके पास 21 गाय है। अब उन्होंने ट्रेडिंग का कार्य बंद कर दिया है।

केस 2

शहर के चादरवाला बालाजी के पास रहने वाले गौरीशंकर वैष्णव ने एक गाय को सेवा के लिए घर पर रखा। इसके बाद एक के बाद एक बढ़ते हुए गायों की संया करीब 7 तक पहुंच गई है। वे कहते है गाय पालन से धर्म कार्य के साथ अर्थ का अर्जन भी हो जाता है।

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वर्ष 2001 में हुई शुरुआत

दूध को लेकर लोगों में जागरूकता लाने के लिए वर्ष 2001 में हर साल 1 जून को वर्ल्ड मिल्क डे मनाने की शुरुआत की गई। यह दिन संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन की ओर से स्थापित किया गया। दुग्ध दिवस मनाने का कारण लोगों को दूध से होने वाले फायदे बताना है। दूध पीना शरीर के लिए कई मायनों में फायदेमंद होता है। दूध में कई तरह के विटामिन और प्रोटीन पाए जाते है। हमारे यहां तो दूध को सपूर्ण आहार माना जाता है।

इस तरह समझें दूध उत्पादन का गणित

जिले में गाय व भैंस वंश 6 लाख 90 हजार 678 है। इनमें से 50 प्रतिशत गाय व भैंस वंश को दूध देने योग्य माना जाता है। जिसका अर्थ है जिले में 3 लाख 45 हजार 339 गाय व भैंस वंश दूध देने वाला है। इनमें से भी एक साथ आधे से कम 1 लाख 50 हजार गाय व भैंस वंश रोजाना दूध देता है। यदि एक गाय व भैंस 4 लीटर दूध देती है तो जिले में रोजाना 6 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है।

टॉपिक एक्सपर्ट: युवाओं का रुझान बढ़ा

जिले में दूध व डेयरी उद्योग के प्रति युवाओं का रुझान पिछले कुछ सालों में बढ़ा है। कई युवाओं ने एक गाय व भैंस से शुरुआत की थी। आज उनके पास 20 से 30 तक गाय व भैंस है। इस व्यवसाय में किसी तरह का अनुदान देय नहीं है। यदि वह मिलने लगे तो युवा अधिक आकर्षित होंगे और दूध उत्पादन भी बढ़ेगा।
डॉ. मनोज शर्मा, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, पाली