इस समाचार का शीर्षक आपको चौंका सकता है, लेकिन यह सच है। पाली में रहने वाले 4 लाख से अधिक लोग रोजाना 2 करोड़ रुपए से अधिक के तम्बाकू उत्पादों का सेवन कर रहे हैं, जो जिले में रोजाना गेहूं की रोटी खाने की कीमत के बराबर है। यह आंकड़ा वैश्विक व्यस्क तम्बाकू सर्वे के तहत सामने आया है। पाली जिले में रोजाना 3-4 और राज्य में करीब 220 लोगों की तम्बाकू के कारण रोजाना मौत होती है। इसके बावजूद इसका उपयोग कम नहीं हो रहा। हालांकि, कई ऐसे लोग भी है, जिन्होंने परिजनों की सलाह या तम्बाकू से जान गंवाने वालों को देखकर इसे त्यागा है।
भाई को देखा तो बदल गया मन
दोस्तों के साथ रहते हुए तम्बाकू चबाना सीख गया। इसकी लत लग गई। शादी के बाद पत्नी ने कई बार तम्बाकू नहीं खाने को कहा, लेकिन अनुसना कर दिया। करीब छह-सात माह पहले तम्बाकू का उपयोग करने वाले भाई के गले में गांठ हुई। उसका अहमदाबाद में उपचार कराने ले गए। उसे देखा तो मन में कई विचार आए और एक क्षण में तम्बाकू को छोड़ दिया। अब तो तम्बाकू खाने का मन भी नहीं करता। शरीर भी पहले से अधिक स्वस्थ लगता है।
अली रजा, शहरवासी
टाॅपिक एक्सपर्ट
तम्बाकू छोड़ना हितकर
तम्बाकू का उपयोग करने पर ज्यादातर मामलों में कैंसर की चौथी अवस्था या अंतिम अवस्था में ही बीमारी का पता लगता है। उस समय तक अधिकांश मामलों में उपचार संभव नहीं है। तम्बाकू जानलेवा है, यह सभी जानते है। मैं स्वयं तम्बाकू का उपयोग करता था। कैंसर से जंग जीतने के बाद इसे छुड़वाने में जुट गया और आज तक सैकड़ों लोगों को इससे मुक्त किया है। तम्बाकू छोड़ने पर पहले तीन-चार दिन थोडी परेशानी हो सकती है। उसके बाद सबकुछ ठीक हो जाता है।
केसी सैनी, साइकोलोजिस्ट, जिला तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ, पाली