
Interview : दिव्यांगों को सशक्त बनाने के लिए सहानुभूति नहीं सहयोग की जरूरत: डॉ. भंडारी
पाली शहर की युवा शख्सियत डॉ. वैभव भंडारी फिर चर्चा में है। भंडारी को दो राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए नामित किया है। वे यशवंत केलकर युवा पुरस्कार व से नवाजे जाएंगे। दिव्यांगों को सशक्त बनाने के लिए समर्पित भंडारी को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से 10 दिसम्बर को दिल्ली में आयोजित 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन में दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर और आत्मविश्वास युक्त बनाने में सराहनीय कार्य के लिए यह पुरस्कार दिया जाएगा। यह पुरस्कार प्रति वर्ष देश भर में एक युवा को दिया जाता है। सरकारी कार्यालयों में रैंप बनवाना हो या बौद्धिक दिव्यांगता को मतदाता के रूप सम्मिलित करवाना अथवा दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित दिव्यांगों का जीवन संवारने जैसे कार्यों में भंडारी का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। पाली को देशभर में गौरवांवित करवाने वाले भंडारी से दिव्यांगों के मुद्दे पर पत्रिका ने विशेष बातचीत की। पेश है अंश...।
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Q : आप राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए नामित हुए है कैसा महसूस कर रहे हैं?
A: यह पुरस्कार मेरे लिए गौरव की बात है। पाली जैसे छोटे शहर के युवा को राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार मिलना एक प्रमाण है कि आप के कार्य अच्छे हैं। इससे यह भी प्रमाणित होता है कि आप सही दिशा में जा रहे है।
Q : दिव्यांगों को मजबूत व सशक्त बनाने के लिए क्या किया जाना चाहिए?
A : दिव्यांगों को मुख्यधारा में लाने के लिए सबको मिलकर प्रयास करना होगा। नियम व कानून तो बने हैं, लेकिन आज भी दिव्यांगों का बहुत बड़ा तबका अधिकारों के लिए लड़ रहा है। मुख्यधारा से वंचित है। समाज के हर व्यक्ति को दिव्यांगों को प्रति अपनी विचारधारा बदलनी होगी। धरातल पर बदलाव की आवश्यकता है।
Q : आम नागरिक, समाज और सरकार...तीनों के लिए दो महत्वपूर्ण सुझाव, जिससे दिव्यांग मजबूत बन सकें।
A: दिव्यांगों को सहानुभूति नहीं चाहिए। आम नागरिक को चाहिए कि वे दिव्यांग को स्वावलम्बी बनाने में आगे आएं। वहीं सरकारों को चाहिए कि वे दिव्यांगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर से मुक्ति दिलाएं। योजनाओं का इतना सरलीकरण किया जाए कि उसे घर बैठे लाभ मिल सके।
Q : क्या चुनावों में दिव्यांगों के मुद्दे भी सामने आए, विधानसभा-लोकसभा में दिव्यांगों की बात उठती हैं?
A : चुनावों में दिव्यांगों की बात कोई नहीं करता। ऐसे मुद्दे चुनावोें की सुर्खियां कभी नहीं बनते। रही बात विधानसभा और लोकसभा में सवाल उठाने की, कई सदस्य सवाल तो जरूर पूछते हैं, लेकिन इससे होता कुछ नहीं है। देश में अपेक्षा के अनुरूप दिव्यांगों के लिए सशक्त योजनाएं बनाने की महत्ती जरूरत है।
Q : अब आप दिव्यांगों के लिए क्या करेंगे...कोई प्लान?
A : इस क्षेत्र में कई तरह के चैलेंज हैं। दिव्यांगता कई तरह की होती है। सबके अलग-अलग चैलेंज है। दिव्यांगता के अनुरूप योजनाएं बनाई जानी चाहिए। इसके लिए मैं प्रयास करता रहूंगा। क्रिटिकल दिव्यांग सम्मानपूर्वक और गरीमामय जीवन जी सके, इसके लिए प्रयास करूंगा। इसके लिए सरकार और विभिन्न मंचों पर आवाज उठाता रहता हूं। यहां तक की सुप्रीम कोर्ट तक कई मामलों को ले जाने का प्लान बना रखा है। दिव्यांगों के अधिकारों की लड़ाई हर स्तर पर लड़ता रहूंगा। यही मेरे जीवन का मुख्य उद्देश्य है।
Updated on:
29 Nov 2023 09:19 pm
Published on:
29 Nov 2023 05:28 pm
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