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Panna National Park: पन्ना नेशनल पार्क में मिलीं घास की 40 से अधिक प्रजातियां, विविधता से भरा है यह जंगल

Panna National Park- शोध परिणाम से सेंट्रल इंडिया में घास के मैदानों के बेहतर प्रबंधन में मिलेगी मदद...>

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पन्ना

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Manish Geete

Nov 23, 2021

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Panna National Park

पन्ना. वन्य जीवों के लिए पन्ना नेशनल पार्क विविधता से भरा है। इनमें 17 प्रजातियां बारहमासी है, जिनसे शाकाहारी जीवों के संवर्धन में मदद मिल रही है। दरअसल, शाकाहारी वन्यप्राणियों के भोजन की उपलब्धता का पता लगाने के लिए कोर व बफर क्षेत्र में पाई जाने वाली घासों का दो माह तक शोध किया गया। जिसके नतीजे उत्साहजनक आये हैं। पन्ना नेशनल पार्क में हुई शोध कार्य से सेंट्रल इंडिया में घास के मैदानों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी। पार्क प्रबंधन ने खाद्य श्रेणी की घांसों के संबंध में अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के लिए घास के हर्वेरियम भी तैयार कराए हैं।

पन्ना नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर विजयान्नथम टीआर ने बताया कि १३ से १४ प्रजाति की घास अखाद्य श्रेणी की हैं। शेष खरपतवार के रूप में चिन्हित की गई हैं। उन्होंने बताया, दुनियांभर में घास की करीब १० हजार प्रजातियां पाई जाती हैं। जिनमें से भारत में करीब डेढ़ हजार प्रजाति की घांस पाई जाती हैं। सेंट्रल इंडिया में महाराष्ट्र और मप्र में इन्हीं ४० प्रजातियों की घास समान्य तौर पर मिलती हैं।

आसान नहीं था घास के प्रजातियों की पहचान

पहचान के लिए घासों के फूलने के समय को शोधकार्य के लिए चुना। सितंबर-अक्टूबर में घास की प्रजातियों के फूलने पर लगातार दो माह तक शोध कार्य चला। पाई गई घास की प्रजातियों को खाद्य और अखाद्य श्रेणी में बांटा गया। खाद्य श्रेणी में उन्हीं घासों को रखा है जिन्हें खरगोश, चीतल, नीलगाय, सूअर,सांभर सहित अन्य दूसरे शाकाहारी वन्यप्राणी खाते हैं।

यह हैं खाद्य व अखाद्य श्रेणी के घासों की प्रमुख प्रजातियां

पन्ना नेशनल पार्क में पाई जाने वाली खाद्य श्रेणी की बारहमासी घास की प्रजातियों में फुलेरा, बड़ा फुलवा, बड़ा फुलेरा, दूव घास, छोटी कांदी, डिजिट घास, लम्पा, मुरोल है। जबकि खाद्य श्रेणी की ही वार्षिक घास की प्रमुख प्रजाति में वन बाजारा कुटकी, गोंदवली, मथनी, मोरजना, जंगली चावल, दीनानाथ घास, छोटी गुनेर हैं। इसी प्रकार से अखाद्य श्रेणी की प्रमुख घासों में घोड़चपा, भुरभुसी, दूधकांदी,चिचवी, घोड़ापूॅछ, लोमड़ी पूछ, लपटउवा, कांटा झाडूं य खड्डा, बासिन, पनछुआ, भैंस घास, उरई, बाहल, कुश, सिक्का, सफेद उरई, छोटी भुरभुसी, कांस, सरगम आदि प्रमुख हैं।

घांस के मैदान के प्रबंधन में मिलेगी मदद

सेंट्रल इंडिया में पन्ना नेशनल पार्क में पाई जाने वाली प्रजाति की घासें ही प्रमुखता से पाई जाती हैं। इससे वन्यप्राणियों के लिए उपयोगी खाद्य श्रेणी के घासों के मैदान तैयार करके अखाद्य श्रेणी की घांसों को कम किया जाएगा। इससे शाकाहारी वन्यप्राणियों के लिए अधिक मात्रा में भोजन उपलब्ध रहने से उनकी संख्या बढग़ी। पन्ना नेशनल पार्क में बाघों की बढ़ती आबादी को मैनेज करने के लिए यह जरूरी भी है कि बाघों को आसपास के क्षेत्र में पर्याप्त शिकार मिले। ग्रासलैंड के बेहतर मैनेजमेंट से बाघों के लिए पार्क में भरपूर मात्रा में शाकाहारी वन्यप्राणी शिकार के रूप में उपलब्ध रहेंगे। इससे बाघों को शिकार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और छोटी टेरेटरी में भी बाघ आसानी से अपना शिकार प्राप्त कर सकेंगे।

अच्छा शोध हुआ

पन्ना नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर विजयान्नथम टीआर कहते हैं कि पन्ना नेशनल पार्क में घासों की प्रजातियों पर सबसे अच्छी तरीके से शोध हुआ है। इसका लाभ पूरे सेंट्रल इंडिया को मिलेगा। खाद्य श्रेणी की वार्षिक और बारहमासी घास के प्रजातियों की पहचान होने से घास के मैदानों का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा।

पलायन रोकना बड़ी चुनौती

दा लास्ट वाइल्डनेश फाउंडेशन के फील्ड क्वार्डिनेटर इंद्रभान सिंह बुंदेला कहते हैं कि पन्ना नेशनल पार्क में बाघों की संख्या बढऩे से उनको पलायन करने से रोकना बड़ी चुनौती है। इसी से निपटने के लिए बाघों को उनके आसपास शिकार उपलब्ध कराने की दिशा में यह शोध महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे बाघों के शिकार के लिए शाकाहारी वन्यप्राणी सहज उपलब्ध होंगे।

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