
शशिकांत मिश्रा
पन्ना. टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश बाघों की कब्रगाह बन रहा है। महज 11 महीने में 35 बाघों की मौत हो गई। आलम यह है कि नेशनल पार्क में ही बाघ सुरक्षित नहीं हैं। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथारिटी(एनटीसीए) द्वारा बाघों की मौत के जारी किए गए आंकड़े मध्यप्रदेश के लिए बेहद डरावने हैं। जनवरी 2021 से अब तक देशभर 107 बाघों की मौत दर्ज की गई है। इनमें अकेले एक तिहाई से अधिक मौतें मध्यप्रदेश में हुईं।
यह स्थिति तब है जब मध्यप्रदेश ने कड़े मुकाबले में महज दो बाघ ज्यादा होने के चलते 2018 की गणना के आधार पर टाइगर स्टेट का दर्जा वापस पाया था। लेकिन एनटीसीए के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में कर्नाटक की तुलना में एक साल से भी कम समय में 20 से ज्यादा बाघ खो दिए। इस अवधि में कर्नाटक में 15 बाघों की मौत दर्ज की गई, जबकि मध्यप्रदेश का आंकड़ा 35 पहुंच गया। यानी की औसतन तीन बाघ प्रदेश में दम तोड़ रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि वन व नेशनल पार्क से लेकर टाइगर रिजर्व तक का प्रबंधन मौत की वजह की तह तक नहीं पहुंच पा रहा है।
हीरा की मौत ने खोली नाकामी की पोल
पन्ना नेशनल पार्क के सबसे अधिक लोकप्रिय बाघ हीरा की सतना के जंगल में हुए शिकार ने वन विभाग की नाकामी की पोल खोलकर रख दी है। सेटेलाइट कालर आइडी से लैस होने के बाद भी वन अमला उसकी लोकेशन तक पहुंचने में गंभीर लापरवाही बरती। पन्ना नेशनल पार्क की ओर से लगातार दिए जा रहे अपडेट के 18 दिन बाद तक लोकेशन के इर्द-गिर्द सुरक्षा घेरा नहीं बना सका। बाघ की हत्या कर दी गई, उसका सिर काट कर ले गए खुले आसमान के नीचे पड़े कॉलर आइडी तक पहुंचने में अमले ने एक पखवाड़े का वक्त लगा दिया। तब तक उसका शरीर भी गल चुका था।
नेशनल पार्क में मरे 20 बाघ
इस साल प्रदेश के 4 टाइगर रिजर्वों में कुल 20 बाघों की मौत हुई है। इनमें सबसे अधिक 10 बाघ प्रदेश के बांधवगढ़ नेशनल पार्क में मरे। वहीं, कान्हा नेशनल पार्क में 5, पेंच में 4 और पन्ना नेशनल पार्क में एक बाघ की मौत हुई है। बाकी 15 बाघों की मौत प्रदेश के सामान्य वन मंडलों और सेंचुरी आदि क्षेत्रों में हुई है।
मई: मौत का महीना
प्रदेश में मई के माह में जब पूरा देश कोरोना के भयावह संकट से जूझ रहा था। तब यह समय बाघों पर भी काल बनकर टूटा। मई में इस साल सबसे अधिक आठ बाघों की मौत हुई। वहीं, जनवरी में 6 बाघों की मौत हुई थी। अधिकांश बाघों की मौत के मामलों में किसी प्रकार की जब्ती भी नहीं हुई है।
कर्नाटक में 15 बाघों की मौत
टाइगर स्टेट के दूसरे दावेदार रहे कर्नाटक राज्य बाघों की मौत के मामले में मध्यप्रदेश से काफी पीछे रहा। एनटीसीए के आंकड़ों के मुताबिक कर्नाटक में 15 बाघों की मौत हुई। तो मध्यप्रदेश इससे दोगुना अधिक था। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट का मानना है कि कर्नाटक में स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स काम कर रही है। वहां वन्यप्राणी अपराधों के मामले में जांच का स्तर और सजा दिलाने का प्रतिशत मप्र से कहीं अधिक है।
प्रदेश में बाघों की मौत के आंकड़े 1 जनवरी से 6 नवंबर 2021 तक एक नजर में
किस माह कितने बाघों की मौत
जनवरी-6
फरवरी -3
मार्च-4
अप्रेल-4
मई-8
जून-1
जुलाई-1
अगस्त-5
सितंबर-0
अक्टूबर-1
नवंबर(6 नवंबर तक)-2
एसटीएफ नहीं, इसलिए निगरानी कमजोर
स्पेशल टाइगर फोर्स (एसटीएफ)के लिए केंद्र सरकार राशि देती है इसके बाद भी प्रदेश में इसका गठन नहीं किया गया। कोर्ट द्वारा कहा गया था कि जब तक स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स का गठन नहीं होता ह ैतब तक वैकल्पिक तौर पर पुलिस की सहायता ली जा सकती है। प्रदेश में पुलिस की भी सहायता नहीं ली जा रही है। प्रदेश में वन्यप्राणी अपराधों के मामले में जांच का स्तर बहुत ही लचर है इसी प्रकार सजा कोर्ट से सजा दिलाने के मामले में भी प्रदेश फिसड्डी है। इसी कारण से प्रदेश में बाघों के शिकार के मामले बढ़ रहे हैं। प्रदेश में बाघों के रहवास को भी सुरक्षित नहीं बनाया जा रहा है, हीरा का शिकार इसका उदाहरण है।
-अजय दुबे, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट
Updated on:
08 Nov 2021 09:51 am
Published on:
08 Nov 2021 09:48 am
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