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प्रशासन की अनदेखी से रेत के ढेर में तब्दील हुआ अजयगढ़

अवैध खदान संचालकों ने बनाए सैकड़ों अवैध डंप,कई डंपों में इतनी रेत कि पहाड़ की तरह दिखने लगेकरोड़ों की भारी भरकम मशीनों का हो रहा धडल्ले से उपयोग।

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Ajaygarh has been transformed into a pile of sand from the administrat

Ajaygarh has been transformed into a pile of sand from the administrat

पन्ना/अजयगढ़। रेत के गढ़ के रूप में प्रसिद्ध अजयगढ़ क्षेत्र अब अवैध डंपों का गढ़ बन गया है। यहां सडकों के किनारे और खेतों में जहां देखो वहीं रेत के अवैध डंप दिखाई दे रहे हैं। संचालकों ने बारिश के सीजन में रेत बेचने अवैध डंप तैयार कर लिए हैं। इससे क्षेत्र में जहां चले जाओ वहीं रेत के अवैध डंप देखने को मिल जाएंगे। अभी तक इन डंपों में रखी हजारों घन मीटर रेत को पकडऩे की कार्रवाई नहीं की जा रही है।

इससे कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं, जबकि पूरा क्षेत्र अवैध रेत के डंपों के साए में हैं। गौरतलब है कि जिले का अजयगढ़ और धरमपुर क्षेत्र रेत के लिए जाना जाता है। यहां से हर दिन हजारों ट्रक रेत निकाली जाती है। करीब आधा सैकड़ा खदानों का संचालन अवैध रूप से किया जा रहा है। जिनमें करोड़ों की भारी भरकम मशीनों का भी उपयोग किया जाता है। जिले में एक साल में पकड़ी गई कुल मशीनों की आधी मशीनें तो सिर्फ जिगनी रेत खदान में ही पकड़ी गई हैं। क्षेत्र में कार्रवाई होने के बाद भी उसी तरह से कारोबार चलता रहता है। अब बारिश का सीजन शुरू हो चुका है। जब तक तेज बारिश नहीं होती है तब तक कारोबारी नदी से रेत निकालने में लगे हुए हैं, शासन की ओर से रेत का उत्खनन पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जा चुका है।

जहां देखो वहीं रेत के डंप
अजयगढ़ क्षेत्र में तो हालत यह है कि जहां भी देखो वहीं रेत के डंप दिखाई देते हैं। इनमें से 80 फीसदी से अधिक डंप अवैध हैं। रेत के इन डंपों की जानकारी पुलिस, राजस्व और खनिज विभाग को भी है। स्थानीय लोगों द्वारा समय-समय पर जानकारी भी दी जाती है। इसके बाद भी जिम्मेदार लोगों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता है। इन रेत के डंपों से भी कारोबारी बारिश के पूरे सीजन करीब दोगुने दाम पर रेत बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। इस अवैध कारोबार में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा तो कभी कार्रवाई भी की जाती है पर खनिज विभाग के अधिकारियों की कार्रवाई शायद ही कभी सुनने को मिले। खनिज विभाग के अधिकारी फील्ड में काम करने के बजाए कार्यालय में ही अधिक समय बिताते हैं। जिससे उन्हें शहर सहित पूरे क्षेत्र में हो रहे खनिज के अवैध उत्खनन, अवैध भंडारण और अवैध बिक्री के अनैतिक काम दिखते ही नहीं है।

सरकारी जमीनों पर भी रेत के डंप बना लिए
रेत के अवैध कारोबारियों ने निजी के साथ ही सरकारी जमीनों पर भी रेत के डंप बना लिए हैं। ग्राम भानपुर की भटिया में खसरा नंबर 913 में रेत का अवैध डंप बनाया गया है। यहां 300डंपर से भी अधिक रेत डंप है। जिसकी अनुमानित कीमत करीब एक करोड़ रुपए है। अभी तेज बारिश में देरी होने से डंप का साइज बढ़ता जा रहा है। मोहाना रेत खदान में भी करीब 600 डंपर रेत डंप की गई है। यहां की रेत खदान में अभी भी दिनरात करीब 100 ट्रैक्टरों से रेत ढोने का काम चल रहा है।
इसके साथ ही तुर्कातरी, बरकोला, उदयपुर और मानपुर क्षेत्र में आधा सैकड़ा से भी अधिक रेत के बड़े-बड़े डंप हैं। एक-एक डंप में हजारों घन मीटर रेत का स्टॉक है। पता नहीं यह किसी जिम्मेदार अधिकारी को दिख क्यों नहीं रहा है। यह फिर वे जानबूझकर देखना नहीं चाहते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि खनिज विभाग द्वारा किसी प्रकार की जानकारी भी नहीं दी जाती है।

जिला मुख्यालय में भी रेत की अवैध बिक्री
ऐसा नहीं कि सिर्फ अजयगढ़ और धरमपुर में ही रेत के अवैध डप लगे हुए हैं। शहर में भी दर्जनों जगह पर रेत के न सिर्फ अवैध डंप लगे हुए हैं बल्कि अवैध रूप से बिक्री भी की जा रही है। बेनी सागर तालाब के ऊपर तो बकायदे नगर पालिका की चौपाटी का उपयोग भी रेत के अवैध कारोबार के लिये किया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि इसके लिये नगर पलिका के ही कुछ लोगों द्वारा वसूली भी की जाती है। जिसकी जानकारी नपा परिषद और वरिष्ठ अधिकारियों को भी है। शहर के अंदर जनपद कार्यालय के सामने पॉवर हाउस रोड में एक धार्मिक स्थल के पास सहित आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर रेत की अवैध बिक्री चल रही है।


क्षेत्र में रेत के अवैध डंप लगे होने की जानकारी अभी तक नहीं थी। जानकारी के सत्यता की जांच कराई जाएगी। जांच में अवैध डंप पाए जाने की स्थिति में जब्ती की कार्रवाई की जाएगी।

राजेंद्र मिश्रा, तहसीलदार