
panna tiger reserve
पन्ना. बाघ पुनस्र्थापन योजना की सफलता के बाद पन्ना टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनकर उभरा है। यहां पर्यटन को बढ़ावा देने पार्क प्रबंधन द्वारा नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। टाइगर ट्रेकिंग दस्ते द्वारा टूरिस्ट जोन की सड़क पर सिग्नल लेने के साथ ही गाइडों के बीच टाइगर की लोकेशन डिस्क्लोज की जा रही है। वीआइपी लोगों को बाघ दर्शन कराने में तो टाइगर ट्रेकिंग दल को ही उनके साथ लगा देते हैं।
ऐसे हुआ खुलासा
टूरिस्टों को टाइगर लोकेशन डिस्क्लोज करने की जानकारी लंबे समय से मिल रही थी। इसे लेकर पत्रिका टीम ने पन्ना टाइगर रिजर्व के मड़ला गेट से टाइगर रिजर्व का भ्रमण किया। सुबह करीब 10 बजे हिनौता गेट से करीब 5 किमी. अंदर टाइगर रिजर्व में टूरिस्ट जोन की रोड के बगल में ही पानी की व्यवस्था की थी। इससे टाइगर पानी पीने आए तो पर्यटकों को दर्शन हो सके। सुबह 10 बजे बताया गया कि नाले के बगल में एक बाघ बैठा है। यह बाघ रेडियो कॉलर्ड होने से ट्रेकिंग दस्ते के पास उसके हर मूवमेंट की जानकारी थी।
सामान्यतया नहीं होती टी-3 की साइटिंग
गाइड ने बताया, टी-3 को फादर ऑफ पन्ना टाइगर रिजर्व के रूप में पहचाना जाता है। यह बेहद शर्मिला बाघ है और इसकी साइटिंग कम होती है। साल में सिर्फ 3-4 बार ही दिखाई देता है। ट्रेकिंग दस्ते ने बाघ के दूसरे ओर जाने की जानकारी देने के साथ ही दूसरी ओर मुड़ गया।
यह है गाइडलाइन में
आरटीआइ एक्टीविस्ट अजय दुबे की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई एक जनहित याचिका को लेकर कोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए ट्रेकिंग दल टाइगर की लोकेशन को डिस्क्लोज नहीं करेगा। इसकी जानकारी वह सिर्फ फील्ड डायरेक्ट को बता सकता है। इसके अलावा टाइगर को ट्रेक करके किसी प्रकार से पर्यटकों को नहीं दिखाया जाएगा। एक स्थान पर अधिक संख्या में टूरिस्ट वाहनों को नहीं रोका जाएगा। वाहनों में तैनात गाइड की यह ड्यूटी रहती है कि वह सुको और एनटीसीए की गाइड लाइन का पालन करे और वाहन चालक का यह दायित्व है कि वह टूरिस्ट से गाइडलाइन का पालन कराए। ऐसा नहीं करने पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान है।
Published on:
14 Jun 2018 09:04 am
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