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टाइगर स्टेट में बाघों की लड़ाई, घायल बाघ की तस्वीर हुई वायरल

panna tiger reserve- वर्चस्व की लड़ाई में नर बाघ पी-243 घायल, पड़े कीड़े, पन्ना टाइगर रिजर्व का मामला

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पन्ना

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Manish Geete

Nov 05, 2022

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पन्ना/अजयगढ़। वर्चस्व की लड़ाई में पन्ना टाइगर रिजर्व का नर बाघ पी-243 घायल हो गया है। नाक और माथे के बीच में हुए घाव में कीड़े पड़े दिखाई दे रहे हैं। शुक्रवार को पार्क में घूमने आए पर्यटकों ने उक्त बाघ को सुबह धुधुआ सेहा के पास स्थित टॉवर के पास घायल अवस्था में देखा और फोटो-वीडियो बनाकर पार्क प्रबंधन को जानकारी दी। इस पर प्रबंधन ने बताया कि आठ से दस दिन पूर्व घायल होने की आशंका है।

शुक्रवार की सुबह मडला गेट से पार्क घूमने पहुंचे कुछ पर्यटकों ने इस युवा बाघ को सुस्त हालत में घूमते हुए देखा। आशंका होने पर उन्होंने कैमरे जूम कर बाघ को देख तो नाक के ऊपर चोंट के निशान दिखे। कैमरे में चोट में कीड़े पड़े भी दिखाई दे रहे थे। इस पर पार्क प्रबंधन को जानकारी दी।

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पन्ना टाइगर रिजर्व के वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि यह आठ-दस दिन पुराना घाव लग रहा है। बाघ के घायल होने की जानकारी पूर्व से है। नजर रखे हुए हैं। प्रयास किया जा रहा कि बाघ का घाव प्राकृतिक रूप से ठीक हो जाए। यदि घाव आगामी दिनों में प्राकृतिक रूप से ठीक नहीं होता तो उसे ट्रैंकुलाइज कर ऑपरेशन करना पड़ेगा। यह लंबी प्रक्रिया है।

कुनबा बढ़ने के संकेत, टाइगर स्टेट का दर्जा रहेगा बरकरार

मध्यप्रदेश टाइगर स्टेट है। प्रदेश में नवंबर 2021 से गिनती शुरू हुई है थी। तीसरा चरण अप्रेल 2022 में पूरा हुआ। इसके बाद संरक्षित क्षेत्रों में चौथे चरण की गिनती शुरू हुई। पार्कों में ट्रैप कैमरे लगाकर बाघों की आवाजाही कैद की गई। अलग-अलग पार्कों में सितंबर तक गणना चली। इस साल हुई गणना से प्रदेश में बाघों का कुनबा बढ़ने के आसार हैं। उम्मीद की जा रही है कि 150 बाघ बढ़ेंगे। यदि ऐसा हुआ तो प्रदेश में 700 से ज्यादा बाघ हो जाएंगे। वर्ष 2018 की गणना में प्रदेश में 526 बाघ थे। यह संख्या देश में सबसे ज्यादा है। दूसरे नंबर पर कर्नाटक राज्य आया था। वहां 524 बाघ पाए गए थे। यदि मप्र में बाघ बढ़ते हैं तो टाइगर स्टेट का दर्जा बरकरार रह सकता है।

ऐसे की जाती है गणना

विशेषज्ञों के अनुसार बाघों की गणना जंगल में एक तय स्थान पर ट्रांजिट लाइन खींचकर की जाती है। सुबह से शाम तक इस लाइन से गुजरने वाले जानवरों की गिनती के आधार पर रिपोर्ट तैयार होती है। सैटेलाइट इमेज, ट्रैप कैमरे से ली गई फोटो और जंगल से लिए गए डाटा का मिलान किया जाता है। भारतीय वन्यजीव संस्थान अलग-अलग फोटो में बाघ के शरीर की धारियों का मिलान कर तय करते हैं कि एक ही बाघ है या अलग-अलग।