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देश में पहली बार शुरु हुई गिद्धों की GPS टैगिंग, अब स्पष्ट रूप से मिलेगी ये खास जानकारी

गिद्धों के व्यवहार और रहवास के बारे में स्पष्ट और प्रमाणित जानकारी प्राप्त करने के लिए भारत में पहली बार गिद्धों को जीपीएस टैगिंग करने की अनूठी पहल शुरु की गई है।

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देश में पहली बार शुरु हुई गिद्धों की GPS टैगिंग, अब स्पष्ट रूप से मिलेगी ये खास जानकारी

पन्ना. मध्य प्रदेश के गिद्धों के व्यवहार और रहवास के बारे में स्पष्ट और प्रमाणित जानकारी प्राप्त करने के लिए भारत में पहली बार गिद्धों को जीपीएस टैगिंग करने की अनूठी पहल शुरु की गई है। मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में गिद्धों को पकड़कर जीबीएस टैगिंग करने का कार्य शुरु किया गया है। गिद्ध टेली मेट्री परियोजना की ये उपलब्धि प्राप्त हुई है। इन्होंने अबतक यहां मौजूद गिद्धों में से 25 को जीपीएस टैगिंग कर दी है।

इस अनूठी पहल से अब तक 14 गिद्ध प्रजातियों को 24 देशों में टैग कर अध्ययन किया गया है। इसमें से कोई भी भारत का नहीं है। आपको बता दें कि, भारत में गिद्धों की 9 प्रजातियां पाई जाती हैं। गिद्ध प्रजाति के संरक्षण में प्रदेश को अच्छे परिणाम मिले हैं। सिर्फ मध्य प्रदेश में ही साल 2021 में गिद्धों की संख्या बढ़कर 9 हजार 446 हो गई थी, जो लगातार बढ़ रही है।

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पन्ना टाइगर रिजर्व में ही मौजूद हैं देश की 9 में से 7 प्रजातियां

भारत में पाई जाने वाली गिद्धों की 9 प्रजातियों में से 3 प्रजातियों पर संकट मंडरा रहा है। जबकि, इनमें से 7 प्रजातियां तो प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में ही पाई जाती हैं।इनमें हिमालयन ग्रिफॉन, यूरेशियन ग्रिफॉन और सिनरस जैसी प्रवासी प्रजातियां और भारतीय लंबी चोंच वाला गिद्ध, सफेद पीठ वाला राज गिद्ध और इजीप्शियन गिद्ध जैसी प्रवासी प्रजातियां भी शामिल हैं।


सौर ऊर्जा से चलते हैं GPS टैग

पन्ना टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा के अनुसार, पन्ना टाइगर रिजर्व में पाई जाने वाली गिद्धों की प्रजातियों में से अबतक 25 को सौर ऊर्जा चलित GPS उपकरण से टैग किया जा चुका है। इसमें 3D त्वरण सेंसर शामिल हैं। GPS टैग डेटा उपग्रह के माध्यम से ट्रैक किया जा रहा है। डायरेक्टर शर्मा के अनुसार, जीपीएस टैगिंग का काम पन्ना टाइगर रिजर्व और भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून के शोधकर्त्ता की टीम द्वारा 2020-21 और 2021-22 में सर्दियों के दौरान किया गया है।

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