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465 मीटर लंबी नहर बनाकर लोकपाल सागर आएगा कुड़िया नाले का पानी, विधायक निधि से होगा कार्य

तालाब की सिल्ट हटाने के साथ ही शुरू हुआ नहर बनाने का काम, बारिश का एक मिलियन घन मीटर पानी सहेजने की तैयारी

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Lokpal Sagar Panna Madhya Pradesh

Lokpal Sagar Panna Madhya Pradesh

पन्ना। नगर को पेयजल आपूर्ति करने वाले सबसे बड़े तालाब लोकपाल सागर के गहरीकरण के साथ ही कुडिय़ा नाला के पानी से इसे भरने का काम शुरू हो गया है। इसके लिए कुडिय़ा नाला से लोकपाल सागर तक ४६५ मीटर लंबी और १०.३० मीटर चौड़ी नहर के निर्माण का काम शुरू हो गया है। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी बारिश के सीजन में लोकपाल सागर तालाब भी फुल टैंक लेबिल तक भर जाएगा। इससे एक ओर जहां शहर को पानी की आपूर्ति में आसानी होगी तो वहीं दूसरी ओर आसपास की ग्राम पंचायतों के सैकड़ों किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध रहेगा।
120 वर्ष पुराना तालाब
यदि एकबार यह तालाब फूल टैंक लेबिल तक भर गया तो शहर में पेयजल संकट की स्थित सालों तक नहीं बन पाएगी। इससे लोगों को काफी राहत मिलेगी, साथ ही नगर पालिका को भी पानी के लिए अतिरिक्त संसाधन नहीं जुटाने होंगे। गौरतलब है कि जिला मुख्यालय से करीब 1.50 किमी. की दूरी पर लोकपाल सागर तालाब योजना स्थित है। सिंचाई विभाग का यह तालाब पन्ना रियासत काल में लगभग 120 वर्ष पूर्व आसपास के खेतों की सिंचाई के लिए बनाया गया था। बाद में एक समझौते के तहत इसके पानी का उपयोग नगर पालका द्वारा पेयजल आपूर्ति के लिए किया जाने लगा।
जल भराव क्षमता 6.37 मिलियन घन मीटर
बताया गया कि योजना के निर्माण के समय इसकी कुल जल आवक क्षमता 16 वर्ग किमी क्षेत्र से थी। तालाब की कुल जल भराव क्षमता 6.37 मिलियन घन मीटर थी। जिसमें सिंचाई के लिए जीवित जलभराव क्षमता 6.19 मिलियन घन मीटर एवं मृत जलभराव क्षमता 0.18 मिलियन घन मीटर थी। तालाब में जल आवक क्षेत्र की क्षमता पूर्व में निर्मित किलकिला फीडर नहर मेंं मिट्टी, पत्थर एवं मुरम स्लिप होने से अवरुद्ध हो गई। जिससे धीरे-धीरे इसका जल आवक क्षेत्र घटकर 5.95 वर्ग किमी रह गया है। इससे तालाब पूर्ण क्षमतानुसार भर नहीं पाता है।
जेसीबी से शुरू हुआ काम
तालाब का जल आवक क्षेत्र बढ़ाने के लिए वनविभाग से स्वीकृति के बाद योजना तैयार की गई और एवं 10.30 मीटर चौड़ी नहर का निर्माण कार्य विधिवत शुरू हो गया है। रविवार सुबह से जेसीबी और ट्रैक्टरों के माध्यम से काम दिनभर चला। बताया गया कि नहर निर्माण के दौरान निकलने वाली मिट्टी से नाला डायवर्जन के लिए मिट्टी की मजबूत दीवार बनाकर पानी के बहाव को लोपाल सागर की ओर मोडऩे का कार्य किया जाना है। इस कार्य की लागत राशि 11.14 लाख आंकी गई है। कुसुम सिंह मेहदेले मंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी ने विधायक निधि से 18 लाख रुपए की राशि उपलब्ध कराने की अनुशंसा की है। इससे उक्त कार्य को बारिश शुरू होने से पूर्व पूरा कर लिया जाएगा।
जल भंडारण क्षमता बढ़ाने निकाली जा रही गाद
कुडिय़ा नाले में आने वाले बारिश के पानी से तालाब को भरने के लिए नहर बनाने के साथ ही तालाब के गहरीकरण का काम भी किया जा रहा है। इससे तालाब की जल भराव क्षमता में इजाफा होगा। तालाब में गाद के कारण तालाब में का पानी वेस्ट बीयर की ओर एकत्रित रहता है। इसे निर्मित इंटेक वेल के पास एकत्रित सिल्ट को हटाकर एवं एप्रोच चैनल बनाकर जलभराव बढ़ाने के लिए काम किया जा रहा है। तालाब से सिल्ट एवं एप्रोच चैनल खुदाई से लगभग 11 हजार घनमीटर मिट्टी निकालने की योजना है। प्रस्तावित कार्य की लागत राशि 17.17 लाख रुपए आंकी गई है। योजना के लिए विधायक निधि की शेष राशि 6.56 लाख रुपए का उपयोग किया जाएगा। शेष कार्य के अंतर्गत पश्चिम रेलवे पन्ना की कार्यरत एजेंसी द्वारा मिट्टी उठाने की सहमति दी गई है। इससे पन्ना नगर की वॉटर सप्लाई 15 दिन और बढ़ जाएगी। साथ ही साथ कुडिय़ा नाले के जलग्रहण क्षेत्र से तालाब के जलभराव में लगभग एक मिलियन घनमीटर पानी की वृद्धि होगी, जिससे सिंचाई कि लिए कृषकों को पानी मिल सकेगा।