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MP Atithi Shikshak: प्रिंसिपल ने बेटी को बना दिया अतिथि शिक्षक, बिना स्कूल गए सालभर मिली सैलरी

mp atithi shikshak: गांव वालों ने बताया कि पिछले साल से सिर्फ एक ही शिक्षक स्कूल में हैं। सत्र 2023-24 में एक अतिथि शिक्षिका की नियुक्ति हुई थी, लेकिन वह सिर्फ तीन से चार दिन ही स्कूल आई थीं।

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पन्ना

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Manish Geete

Sep 20, 2024

mp atithi shikshak

mp atithi shikshak: सरकारी स्कूल में पिता प्रिंसिपल हैं, बेटी को अतिथि शिक्षक नियुक्त कर दिया। वो सालभर स्कूल भी नहीं गई, लेकिन हाजिरी पूरी भरती रही और वेतन भी पूरा मिल गया। गांव वालों के आरोपों के बाद अब मामला जांच में है।

पन्ना जिले के रैपुरा के बगरौड़ संकुल की प्राथमिक शाला डोभा में संकुल प्राचार्य की बेटी को अतिथि शिक्षक नियुक्त कर बिना स्कूल गए पूरी हाजिरी भरकर वेतन देने मामला सामने आया है। अब अधिकारी जांच की बात कह रहे हैं।

बताया जा रहा है कि शासकीय प्राथमिक शाला डोभा में प्राथमिक शिक्षक के पद पर अतिथि शिक्षक की नियुक्ति सत्र 2023-24 में निकाली गई थी। इस स्कूल में आकांक्षा अहिरवार की नियुक्ति बतौर अतिथि शिक्षक की गई।

गांव वालों ने मीडिया को बताया कि पिछले साल से सिर्फ एक ही शिक्षक स्कूल आ रहे हैं। जब इस मामले में स्कूल में पदस्थ प्रधान अध्यापक मोहन बंजारा से बात की तो उन्होंने बताया कि सत्र 2023-24 में एक अतिथि शिक्षिका की नियुक्ति हुई थी, लेकिन वह सिर्फ तीन से चार दिन ही स्कूल आई थीं।

प्रधान अध्यापक ने बताया कि वह कक्षा एक से पांचवीं तक की कक्षाओं को खुद ही संभालते आ रहे हैं। कहते हैं, अगर मीटिंग या प्रशिक्षण कार्य आ जाता है तो स्कूल में कोई नहीं रहता। मजबूरन जाना पड़ता है। जब उनसे पूछा गया कि आपने इसके बारे में किसी को बताया तो उन्होंने कहा, संकुल प्राचार्य को बताया था तो उन्होंने कहा था कि फीडिंग नहीं हुई है अभी। अतिथि शिक्षिका के स्कूल आने की जानकारी ग्रामीणों से ली गई तो बताया कि पिछले वर्ष से तो सिर्फ एक ही शिक्षक स्कूल आते हैं। अभी तक कोई अन्य शिक्षक नहीं आया।

पोर्टल पर हाजिरी भी पूरी और वेतन भी

अतिथि शिक्षकों के पोर्टल गेस्ट फैकल्टी मैनेजमेंट स्सिटम पर प्राथमिक शाला डोभा में पदस्थ अतिथि शिक्षिका आकांक्षा की उपस्थिति सौ फीसदी है। जानकारी के अनुसार सत्र 2023- 24 में जनवरी से दिसंबर तक प्रतिदिन स्कूल गई हैं। और गहराई से खंगाला तो पता चला कि अतिथि शिक्षिका को हर माह मानदेय दस हजार रुपए प्रतिमाह दिया गया है।

जरूरतमंद भटक रहे

अतिथि शिक्षकों की भर्ती में लोग इसे एक घोटाले के रूप में देख रहे हैं। जहां एक पोस्ट के लिए आवेदनों के लिए दर बदर भटके रहे हैं, वहीं इस तरह के मामले व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न खड़े कर रहे हैं। मामले में संकुल प्राचार्य के प्रधान अध्यापक और गांव को लोगों को ही झूठा बता दिया।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

मेरे हिसाब से अतिथि शिक्षिका पूरे समय स्कूल गई हैं। इसलिए उन्हें मानदेय भी पूरा दिया गया है।

  • रामप्रसाद अहिरवार, प्राचार्य, बगरौड

हम मामले की जांच कराएंगे। गड़बड़ी मिली तो कड़ी कार्रवाई करेंगे।

  • संघप्रिय, सीईओ जिला पंचायत पन्ना