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MP के इस जिले में दूसरे का स्वास्थ्य जांचने वालों की खुद कॉलोनी अस्वस्थ्य, रोगियों में संक्रमण का खतरा

डॉक्टर्स कॉलोनी में फेंका जा रहा अस्पताल का कचरा, सुरक्षित तरीके से निस्तारण के बजाए लगा दी जाती है आग
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पन्ना

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Suresh Mishra

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Updated: 3 Jul 2018, 7:34 PM IST

Panna Doctors Colony news in hindi

Panna Doctors Colony news in hindi

पन्ना। जिला अस्पताल के विभिन्न वार्डों से निकले संक्रमित कचरे को डॉक्टर्स कॉलोनी के पास फेंका जा रहा है। इसके सुरक्षित निस्तारण के सख्त निर्देशों के बाद भी इसमें आग भी लगा दी जा रही है। इससे दूषित धुआं डॉक्टर्स कॉलोनी सहित आसपास की कॉलोनियों में फैल रहा है। इस दूषित धुएं के कारण डॉक्टरों और आसपास की अन्य कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को संक्रमण का खतरा बना है। इस संबंध में डॉक्टरों द्वारा भी कई बार नाराजगी जताई गई पर इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

गाइडलाइन का नहीं हो रहा पालन
जिला अस्पताल से निकलने वाले संक्रमित कचरे को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने की शासन की स्पष्ट गाइडलाइन है। इसके बाद भी कचरे को अस्पताल के प्रवेश द्वार के सामने बने गड्ढे और आसपास के स्थान पर खुले में डाला जा रहा है। कचरे को मवेशी और -सूअर चारों तरफ फैला देते हैं। लापरवाही के चलते कई बार कचरे में आग तक भी लाग दी जाती है, जबकि इसमें वार्डों से निकली निडिल, सिरींज, बॉलट, इंजेक्शन के एम्पुल, खून से सना कॉटन, पट्टी सहित अन्य सामग्री होती है। यह संक्रमित सामग्री लोगों के स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा इसे जहां फेंका जा रहा है वहीं पर डॉक्टरों के क्वाटर्स भी बने हैं। इससे संक्रमित कचरे की चपेट में डॉक्टर और उनके परिवार के लोगों के भी आने की आशंका है। आइएमए के जिलाध्यक्ष डॉ. योगेंद्र चतुर्वेदी ने बताया, इससे निश्चित ही संक्रमण का खतरा है। इस संबंध में कई बार अस्पताल प्रशासन को अवगत करा चुके हैं, इसके बाद भी समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

प्रतिदिन बड़ी मात्रा में निकलता है कचरा
दो सौ बेड वाले जिला अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में संक्रमित कचरा निकलता है। जिसमें से अधिकांश कचरे को अस्पताल प्रशासन द्वारा इसी तरह से खुले आसमान तले आवासीय बस्ती के पास फेंक दिया जाता है। ऐसा नहीं की जिला अस्पताल प्रशासन यह काम हाल ही में किया जा रहा है, बल्कि समुचित मॉनीटिरिंग की कमी के कारण सालों से इसी प्रकार से कचरे को फेंका और जलाया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा आसपास के लोगों के विरोध को भी ज्यादा तवज्जो नहीं दिया जा रहा है। पूर्व में भी कई बार मामला उठ चुका है। अस्पतालों से निकलने वाले बायोवेस्ट के निस्तारणों को लेकर भोपाल में आयोजित बैठक में प्रदेश के 35 जिलों के सीएमएचओ सहित पन्ना सीएमएचओ को भी तलब किया गया। इसके बाद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

पानी के भी दूषित होने का खतरा
जिला अस्पताल में पानी की समस्या इस साल भी बनी है। इसको देखते हुए अस्पताल प्रशासन की ओर से नया बोर कराया गया है। इस बोर से सप्लाई भी चालू हो गई है। यह नया बोर वहीं पर कराया गया है जहां संक्रमित कचरा डाला जा रहा है। इससे बारिश के दिनों में पानी के दूषित होने की आशंका है। चूंकि इस बोरिंग से पानी की सप्लाई पूरे जिला अस्पताल को होती है इससे आगामी दिनों बोरिंग के पानी से मरीजों और परिजनों को भी बीमारी का सामना करना पड़ सकता है। अस्पताल प्रशासन द्वारा संभवतया बोरिंग के लिए स्थल चयन को लेकर इस बारे में विचार नहीं किया गया होगा।

जिला अस्पताल के ओटी सहित वार्डों से निकलने वाले कचरे को निस्तारित करने सतना की एक एजेंसी से करार है। वे सप्ताह में तीन दिन आते हैं और यहां से कचरा ले जाते हैं। खुले में जो कचरा पड़ा रहता है वह जनरल कचरा होता है। जिसे नगर पालिका उठाकर ले जाती है।
हरिशंकर त्रिपाठी, जिला अस्पताल प्रशासक