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तीन माह बंद रहेंगे MP के ये टाइगर रिजर्व, 1 अक्टूबर के बाद होगा बाघों का दीदार

मानसून सीजन के चलते पर्यटकों के लिए बंद, पांच साल में साढ़े चार हजार से 10 हजार से भी अधिक पहुंचा विदेशी पर्यटकों की आंकड़ा

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panna tiger reserve will remain closed in monsoon

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पन्ना। बाघ पुनर्वास योजना की अभूतपूर्व सफलता और बाघों की जबर्दस्त साइटिंग के चलते पन्ना टाइगर रिजर्व इस साल सीजनभर चर्चा का विषय रहा है। इस साल पार्क खुलने के पहले दिन से ही पर्यटकों को बाघ दिखने लगे थे जो सिलसिला अभी तक जारी रहा।

अब पर्यटकों को थोड़ा निराशा होगी क्योंकि मानसून को देखते हुए पन्ना टाइगर रिजर्व को 30 जून से बंद कर दिया गया है। पर्यटकों के लिए 1 अक्टूबर को फिर पन्ना टाइगर रिजर्व को खोला जाएगा। जुलाई से पन्ना के बाघों का आकर्षण ऐसा रहा कि दुनियाभर में सिर चढ़कर बोल रहा है।

बाघ पुनर्वास योजना की अभूतपूर्व सफलता के बाद पन्ना में आने वाले पर्यटकों का ग्राफ दोगुना से भी आगे बढ़ गया है। यहां के बाघों की दहाड़ पर्यटकों को अपनी ओर खींच कर ले आती है। बीते एक साल में आए दिन बाघों को टाइगर रिजर्व के कोर और बफर जोन के अलावा सामान्य जंगलों में और सड़कों के किनारे देखने की खबरें सुर्खियां बनी हुई हैं।

बाघों का लगातार बढ़ रहा कुनबा
पन्ना टाइगर रिजर्व से में बीते दो-तीन सालों से बाघों का कुनबा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही बाघों की साइटिंग भी जबर्दस्त हो रही है। कई बार तो पर्यटकों को दो-तीन बाघ एक साथ देखने को मिल जाते हैं। अक्सर बाघ एक ही स्थान पर बैठे रहते हैं। यही कारण है कि जो बांधवगढ़ और पेंच में बाघ देखने से मायूस रह जाते हैं उन्हें यहां एक-दो दिन में ही आसानी से बाघ देखने को मिल जाते थे।

बाघ टी-3 की पहचान फादर ऑफ द टाइगर रिजर्व के रूप में
बाघ टी-3 से पन्ना बाघ पुनर्वास योजना की सफलता की शृंखला प्रारंभ हो गई। पार्क की सुरक्षा प्रबंधन एवं सृजन की अभिनव पहल को पहली ऐतिहासिक सफलता तब मिली जब बाघिन टी-1 ने वर्ष 2010 में 4 शावकों को जन्म दिया। जिसके बाद बाघिन टी-2 ने भी 4 शावकों को जन्म दिया। इसके बाद से यह सिलसिला निरंतर जारी है। बाघिन टी-1, टी-2 एवं कान्हा से लाई गई। अद्र्ध जंगली बाघिनों टी-4, टी-5 एवं इनकी संतानों द्वारा अब तक लगभग 70 शावकों को जन्म दिया जा चुका है। जिनमें से जीवित रहे 49 बाघों में से कुछ ने विचरण करते हुए सतना, बांधवगढ़ तथा पन्ना एवं छतरपुर के जंगलों में आशियाना बना लिया है।

ऐसे सिरमौर बने हम
पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की मॉनीटरिंग में तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। बाघ पुनस्र्थापन योजना के प्रारंभिक चरण में सभी बाघिनों को कॉलर आइडी पहनाई गई थी। जिनसे पार्क प्रबंधन उनके एक-एक पग और सांसों तक को गिन सकता था। इसके अलावा टेलीमैट्री का भी उपयेाग किया जा रहा है। यहां ड्रोन द्वारा भी बाघों के मॉनीटरिंग की तैयारिया बीते तीन सालों से चल रही हैं। बाघों की निगरानी के लिए ड्रोन का सहारा लेने के लिए प्रयोगिक स्तर का काम पूरा हो चुका है।

कोलंबिया का मॉडल बना पन्ना टाइगर रिजर्व
जल्द ही यहां ड्रोन से बाघों की निगरानी का काम भी शुरू हो जाएगा। यहां के पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ पुनस्र्थापन योजना की अप्रत्याशियत सफलता से प्रोत्साहित होकर कंबोडिया अपने यहां बाघों के उजड़े संसार को दोबारा बसाने के लिए पन्ना के बाघ पुनस्र्थापन मॉडल को अपनाना चाहता है। वहीं कोलंबिया के 18 वरिष्ठ अधिकारियों का दल भी यहां प्रशिक्षण लेने आया था।

पांच साल में पर्यटक
वर्ष पर्यटक आय(लाख में)
2017-18 27234 --
2016-17 38545 102.8
2015-16 36730 116.27
2014-15 14897 62.15
2013-14 19419 70.34
2012-13 15870 50.75