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प्यार में मदहोश हुए तोते, यहां आई रंग-बिरंगे तोतों की बहार, जानें क्या है इनकी खासीयत

रंग-बिरंगे आकर्षक तोतों की बहार लगी है, अधिकतर पेड़ और उनकी शाखाओं पर चहल-कदमी कर रहे ये तोते लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं.

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प्यार में मदहोश हुए तोते, यहां आई रंग-बिरंगे तोतों की बहार, जानें क्या है इनकी खासीयत

प्यार में मदहोश हुए तोते, यहां आई रंग-बिरंगे तोतों की बहार, जानें क्या है इनकी खासीयत

पन्ना/मडिय़ादो. पन्ना नेशनल पार्क में इन दिनों रंग-बिरंगे आकर्षक तोतों की बहार लगी है, अधिकतर पेड़ और उनकी शाखाओं पर चहल-कदमी कर रहे ये तोते लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं, तोतों पर नजर डाले तो कोई प्यार में मदाहोश नजर आ रहा है, तो कोई एक डाल से दूसरी डाल पर जाते हुए प्रकृति और पर्यावरण का आनंद ले रहा है, वैसे इस प्रकार के तोते बहुत कम दिखाई देते हैं, इस कारण पार्क में ये हर किसी को लुभा रहे हैं।


पन्ना नेशनल पार्क में रंग बिरंगे तोतों की चार प्रजातियां मिली हैं। यह रंग बिरंगे तोले राहगीरों को आकर्षित कर रहे हैं।

दरअसल, तोते देखने में जितने सुंदर होते हैं, उतने ही समझदार पक्षियों की श्रेणी में आते है। एक जमाना हुआ करता था, जब लोग शौक से तोतों को पिंजरे में कैद कर पालते थे, लेकिन अब पक्षियों को कैद कर रखने पर वन विभाग द्वारा पाबंदी लगा दी है। जिसके चलते अब यदाकदा ही कहीं तोते पिंजरों में कैद दिखते है। तोते के पालने का खास कारण तोते द्वारा इंसान की बोली में बोलना हुआ करता था, तोते विभिन्न प्रकार की बोली निकाल कर लोगों का मनोरंजन करते थे। लेकिन अब तोते कम ही पिंजरों में दिखाई देते है।

बुंदेली भाषा में राय प्रजाती के तोते की खास मांग हुआ करती थी, तोते के शौकीन राय प्रजाती के तोते को मुंह मांगे दाम दे कर खरीद लेते थे। जिसकी वजह यह थी कि यह तोता आसानी से इंसानों की भाषा बोलने लगता था। इसके गले में लाल रंग की पट्टी व दोनों पंखों पर लाल रंग क पदम हुआ करते थे, जो इसकी पहचान थी। बीते कुछ समय पहले इन तोतों की मांग को देख कर जमकर तस्करी हुई। जिसके चलते अब इस प्रजाती के तोते कम ही दिखाई देते है। मडिय़ादो क्षेत्र के जंगलों में हरा तोता बड़ी संख्या में दिखाई देते है। इस तोते को गांवों में आम, बेर, अमरूद सहित अन्य फलदार वृक्षों पर आसानी से देखा जा सकता है। इसके अलावा बहुत ही सुंदर दिखने वाला छोटी साईज का तोत स्लेटी व लाल रंग के सिर वाला तोता भी मडिय़ादो के जंगलों में बड़ी संख्या में दिखाई दे रहे है। जिनकी कौतूहल राहगीरों को अपनी ओर आकृषित करती है।

पन्ना नेशनल पार्क प्रबंधन की ओर से कुछ दिनों पूर्व पक्षियों का सर्वे कराया गया था। जिसमें सर्वेक्षण में 247 प्रजातियों के पक्षी मिले। जिनमें से 21 प्रजतियों आईयुसीएन की संकटग्रस्त प्रजातियों की सूचि में शामिल है। मध्य प्रदेश में पाए जाने वाले सभी 7 प्रजातियों के गिद्ध अच्छी संख्या में पाए गए। इनके अलावा कुछ दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी भी मिले है जैसे व्हाइट-टेल्ड आयोरा, मार्शल आयोरा, ओरिएण्टल पाइड हार्नबिल, स्ट्राइटेड ग्रासबर्ड, टाइटलर्स लीफवार्बलर, ब्लैक- विंगड कक्कू श्राइक, ब्लैक- नेक्ड स्टॉर्क आदि।

60 बर्ड वाचर की टीम ने किया था सर्वे
पन्ना नेशनल पार्क का पहला पक्षी सर्वेक्षण 4 से 6 मार्च तक आयोजित किया गया। जिसके परिणाम 17 मार्च को जारी किए गए। इस सर्वेक्षण में भाग लेने के लिए देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 450 आवेदन प्राप्त हुए थे। जिसमे से 60 बर्डवॉचर्स का चुनाव कर 28 टीमें बनाई गई थी। प्रत्येक टीम के साथ पार्क गॉइड भी थे। टीमों ने पन्ना टाइगर रिजर्व की सभी रेंजो के अलग -अलग कैम्पों में रहकर वन क्षेत्र झाड़-झंखाड़ वाले क्षेत्र, घास के मैदान, नदी इत्यादि विभिन्न प्रकार के आवास स्थलों में पाए जाने वाले पक्षियों को डॉक्यूमेंट किया। यह सर्वेक्षण में पक्षियों का डॉक्यूमेंटेशन ईबर्ड एप पर किया गया।

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व्हाइट टेल्ड आयोरा प्रदेश में पहली बार

व्हाइट टेल्ड आयोरा का मध्य प्रदेश से ईबर्ड पर यह पहला रिकॉर्ड है। ओरिएण्टल पाइड हार्नबिल पक्षी का भी मध्य प्रदेश में सिर्फ पन्ना से ही रिकॉर्ड है। स्ट्राइटेड ग्रासबर्ड जो बहुत दुर्लभ है, यहां केन नदी के अलग अलग हिस्सों में अच्छी संख्या में देखी गयी, जिससे यह पता चलता है की यह नदी का पर्यावास इनके लिए कितना अनुकूल है।