
The incidence of snakebite increased during the rainy season
पन्ना. जिले में सांप के डसने और बिच्छू के डंक से दर्जनों लोगों की हर साल मौत हो जाती है। बारिश शुरू होने के साथ ही सर्प दंश की घटनाएं बढ़ जाती है। बड़े पैमाने पर लोग अस्पताल पहुंचते हैं। इन दिनों औसतन हर सप्ताह 8-10 लोग सांप के डसने के कारण इलाज कराने के लिये जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिलेभर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक और उप स्वास्थ्य केंद्रों में सांप के डसने और बिच्छी के डंक मारने से पीडि़त लोग पहुंच रहे हैं।
अपनी सुरक्षा के लिए करते हैं हमला
गौरतलब है कि संाप और बिच्छू बिल बनाकर जमीन के अंदर रहते हैं। बारिश होने से इनके घरौंदों में पानी भर जाता है। इससे वे अपने-अपने बिलों से निकलकर सुरक्षित ठिकाना तलाशते भटकते रहते हैं। किसी व्यक्ति के द्वारा उनके आस-पास पहुंचने पर रक्षा के लिए हमला कर देते हैं। जिलेभर से सांप के डसने और बिच्छू के डंक के शिकार लोग अस्पतालों में बढ़े हैं।
जिला अस्पताल में बढ़े मरीज
जिला अस्पताल में हर दिन औसतन 8-10 केस सर्प दंश के पहुंच रहे हैं। शिकार हुए मरीज को जहरीले सांप ने डसा है या सामान्य सांप ने तय करना डॉक्टरों के लिये भी मुश्किल होता है। एंटी स्नैक वीनम इंजेक्शन तभी दिया जाना चाहिये जहरीले सांप ने डसा हो। यदि सामान्य सांप के डसने पर एंटी स्नैक वीनम दिया गया तो यह नुकसान कर सकता है। लिहाजा मरीज के अस्पताल पहुंचने के बाद कुछ समय तक अब्जर्वेशन में रखा जाता है। फिर इलाज शुरू होता है।
झाड़-फूंक के चक्कर में हर साल मरते दर्जनों लोग
जिले के ग्रामीण अंचल में स्वास्थ्य सुविधाएं सहज उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही ग्रामीण अंचलों में देखा हैकि सांप के डसने के बाद पीडि़त को तुरंत अस्पतालों तक पहुंचाने के बजाए लोग झाड़-फूक कराने में लग जाते हैं। जिससे हर साल कईलोगों की मौत हो जाती है। जबकि डॉक्टरों द्वारा लोगों को सहाल दी जाती है कि वे पीडि़त को झाडू फूंक के चक्कर में डालने के बजाए जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल तक पहुंचाएं जिससे उनकी जान बच सके। सर्पदंश के शिकार होने वाले अधिकांश मामलों में पाया जाता हैकि पीडि़त जमीर पर लेटा हुआ होता है। यदि लोग चारपाई, तखत और पलंग आदि में सोए तो सर्पदंश की करीब ७० फीसदी घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
Published on:
30 Sept 2019 06:12 pm

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