
runjh sinchai pariyojana in panna
पन्ना। बांध के फाउंडेशन निर्माण के लिए हार्ड स्टेटा नहीं मिलने की वजह से खटाई में पड़ी रुंझ मध्यम सिंचाई परियोजना को दोबारा हरी झंडी मिल गई है। इसके तहत करीब-करीब बाइंडअप की कगार पर पहुंच चुकी परियोजना में दोबारा काम चालू हो गया है। जहां एक ओर विभाग की तपरु से परियोजना कार्य के लिए ई-टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से टेंडर बुलाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर भू-अर्चन की कार्रवाई फिर शुरू हो गई है। परियोजना के तहत फिलहाल भू-अर्जन के प्रकरण तैयार कराए जा रहे हैं।
ये है मामला
गौरतलब है कि रुंझ नदी ग्राम मुटवाकला से निकलकर बाघिन नदी में मिलती है। इस नदी पर करीब तीन करोड़ रुपए की लागत से बांध बनाने की स्वीकृति 22 जनवरी 2011 को रुंझ मध्यम सिंचाई परियोजना के नाम पर मिली थी। परियोजना पर चार साल तक चले सर्वे और 42 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया था कि बांध के फाउंडेशन निर्माण के लिए जरूरी गहराई तक हार्ड स्टेटा नहीं मिल पा रहा है। जिस गहराई पर हार्ड स्टेटा मिल रहा है उतनी गहराई पर फाउंडेशन अपेक्षित मजबूती नहीं मिलने की आशंका के चलते यह परियोजना स्थागित कर दी गई थी। इसके साथ ही परियोजना को रिवाइज करने और नया नक्शा तैयार करने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजे गए थे। इसके बाद बीते दो साल से परियोजना बंद जैसे हालत में ही पड़ी थी।
विश्रामगंज का होगा विस्थापन, भुजवई की जमीन भी लेंगे
परियोजना के तहत दो गांवों में भू-अर्जन की कार्रवाई चल रही है। ग्राम विश्रामगंज परियोजना की वजह से पूरी तरह से डूब प्रभावित होगा। जिससे उसका विस्थापन किया जाना है। इसके लिए विभाग द्वारा ग्राम सिमरधा में 28 एकड़ भूमि चिह्नित कर ली गई है। जहां निर्माण कार्य के लिए ग्रामीणों को प्लॉट और राशि दी जाएगी। इसके अलावा वहां पर सड़क, बिजली और पानी की व्यवस्था सरकार द्वारा की जाएगी। ग्राम भुजवाई की भी कुछ एकड़ जमीन अधिग्रहीत की जाएगी, लेकिन उसका विस्थापन नहीं किया जाएगा। वर्तमान में परियोजना की लागत 269.7 करोड़ है। परियोजना चूकि कई साल विलंब से चल रही है इससे इसकी लागत रिवाइज होगी। अनुमानित है कि यह लागत 300 करोड़ से भी ज्यादा हो जाएगी। परियोजना के लिए ई-टेंडर प्रक्रिया से टेंडर भी बुलाए गए हैं। जिससे आगामी दिनों परियोजना में मैदानी स्तर पर काम शुरू होने की उम्मीद बंधी है।
अब औसतन 18-20 मीटर गहराई में मिला हार्ड स्टेटा
विभागीय जानकारी के अनुसार परियोजना की संभावनाओं को पुन: तलाशने के लिए दोबारा कराए गए सर्वे के तहत फाउंडेशन के लिए प्रस्तावित क्षेत्र का जियोलाजिकल सर्वे कराया गया। बोर, -होल और लॉगिन कराए जाने के पर औसतन 18-20 मीटर की गहराई पर हार्ड स्टेटा मिल गया है। इससे परियोजना के फिर से शुरू होने की उम्मीद जागी और इस पर दोबारा काम शुरू हो गया। हार्ड स्टेटा का संबंध मजबूत आधार से है। जहां पर बांध का फाउंडेशन खड़ा किया जाना है।
नया नक्शा तैयार
वहां जरूरी है कि 10 से 15 मीटर की गहराई पर पत्थर मिले, जिससे बांध का आधार मजबूत रह सके। यदि फाउंडेशन के लिए हार्ड स्टेटा 20 मीटर या उससे अधिक गहराई में मिलता है तो फिर वहां पर मजबूत फाउंडेशन खड़ा हो पाना मुश्किल होता है। पूर्व में किए गए सर्वे के अनुसार 26 मीटर तक हार्ड स्टेटा नहीं मिलने की बात सामने आई थी। जिसके कारण परियोजना का डिजाइन निरस्त करने और नया नक्शा तैयार करने के लिए भोपाल जानकारी भेजी गई थी।
साढ़े 12 हजार हेक्टेयर में होगी सिंचाई
परियोजना का काम पूरा होने के बाद अजयगढ़ क्षेत्र के 30 गांव की साढ़े 12 हजार हेक्टेयर की भूमि का सिंचाई होगी। जिन गांवों में अभी सिंचाई नहीं हो पा रही है, इस परियोजना के मूर्त रूप लेने के साथ ही उन गांवों की धरती लहलहा उठेगी। किसानों के घर अन्न से भर जाएंगे। यह परियोजना क्षेत्र के हजारों किसानों के लिए खुशहाली की सौगात लेकर आएगी। परियोजना के पूरा होने का लोगों को सालों से इंतजार है। परियोजना के तहत वन विभाग की 156 हेक्टेयर जमीन डूब में आएगी। जिसके लिए वन विभाग को दक्षिण वन मंडल में लमतरा और खमतरा से लगे गांवों की 156 हेक्टेयर भूमि दी गई है। साथ ही वहां वन लगाने के लिए 33 करोड़ रुपए भी विभाग की ओर से वन विभाग को दिए गए हैं।
नहर के लिए नहीं होगा भूमि का अधिग्रहण
बताया गया कि रुंझ मध्यम सिंचाई परियोजना के तहत ओपेन नहर नहीं बनाई जाएगी। इसके लिए 30 गांव तक किसानों के जमीन के नीचे से पाइपलाइन डाली जाएगी। पाइपलाइन डालने के लिए जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव नहीं है। किसानों के जमीन के नीचे से पाइप जाएंगे और ऊपर सिंचाई कार्य के लिए स्टैंड पोस्ट की तरह -होल बना दिए जाएंगे। इससे किसानों की जमीन बर्बाद नहीं होगी। सीपेज भी नहीं होगा और परियोजना के पानी का अधिकतम उपयोग हो सकेगा।
रुंझ मध्यम सिंचाई परियोजना का काम रुका नहीं है चालू है। काम के लिए एजेंसी भी फाइनल हो गई है। एलएनटी को काम मिला है। जल्द ही मैदानी स्तर पर परियोजना के तहत काम शुरू हो जाएगा। भू-अर्जन का काम भी चल रहा है।
जेके ठाकुर, ईई जल संसाधन विभाग, पन्ना
Published on:
29 May 2018 12:26 pm
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