10 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

किसानों का मोटा अनाज बाजार में बना सुपर फूड, बिक रहा 150 रुपए किलो

मोटा अनाज की बाजार में सुपर फूड के रूप में ब्रांडिंग कर उपभोक्ताओं से पांच गुना तक मुनाफा कमा रही हैं।    

2 min read
Google source verification
Super food made in the market for coarse grain of farmers

पन्ना. कंपनियां मोटा अनाज की बाजार में सुपर फूड के रूप में ब्रांडिंग कर उपभोक्ताओं से पांच गुना तक मुनाफा कमा रही हैं। इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि किसानों की जिस फसल के दाम मंडियों में महज 15 से 20 रुपए किलो तक बोले जा रहे हैं, उसी कोदों का 150 रुपए किलो मिल रहा है।


पांच साल में 60 फीसदी घटा रकबा
बाजार में सुफर फूड के रूप में स्थापित हो चुके मोटे अनाज की खेती को प्रोत्साहन एवं बोनी करने वाले किसानों को उचित दाम न मिलने के कारण विध्य में मोटा अनाज की बोवनी का रकबा तेजी से घट रहा है। पांच साल पहले रीवा संभाग के चार जिलों में डेढ़ लाख हेक्टेयर में ज्वार, बाजरा, कोदों एवं मक्का की खेती होती थी, वहीं 2021 में यह रकबा 50 हजार में सिमट गया खेती का रकबा एक हजार हेक्टेयर से भी नीचा आ गया है। रीवा जिले में तो मोटे


किसानों के बीच मोटे अनाज के प्रति रुझान बढ़ाने के लिए जिले में प्रोसेस यूनिट लगाने की जरूरत है। यूनिट लगाने से किसानों की उपज आसानी से प्रोसेस हो जाएगी, जिससे उन्हें उचित दाम मिलेगा। जिले के कल्दा पठार क्षेत्र में मोटे अनाज का अच्छा खासा रकवा है। लेकिन खेती को प्रत्साहन न मिलने और उचित दाम न मिलने के कारण किसानों का मोह भंग हो रहा है। उद्यानकीय और कृषि विभाग दोनों ही इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

यह भी पढ़ें : शराब ठेकेदारों पर आबकारी एक्ट में दर्ज होगा प्रकरण, जानें क्या है मामला

भाव मिले तो बढ़े रकबा

बुंदेलखंड मोटे अनाज की खेती में दो दशक पूर्व प्रदेश में अव्वल था। लेकिन, मंडियों में भाव न मिलने के कारण धीरे धीरे किसानों ने मोटे अनाज की परंपरागत खेती छोड़ धान गेहूं एवं सोयाबीन की बोवनी करने लगे। बढ़ती बीमारियों के बीच भारत ही नहीं विश्व के बाजार में मोटे अनाज की मांग तेजी से बढ़ी है। महानगरों में मोटा अनाज वीआइपी परिवारों के बीच सुपर फूड के रूप में स्थान बना चुका है। ऐसे में यदि सरकार मोटा अनाज की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करे तो न सिर्फ विंध्य में इसकी खेती का रकबा बढ़ेगा, बल्कि मोटा अनाज की खेती किसानों के लिए लाभ का धंधा भी बन सकती है।