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‘रामबहादुर’ के झपट्टे खाकर जंगल भागा बाघ का शावक, इस तरह 50 घंटे तक बना रहा सिरदर्द

दूसरे दिन रेस्क्यू के लिए बुलाए गए दो अतिरिक्त हाथी और वाहन, करीब 80 अधिकारी और कर्मचारियों ने निभाई सहभागिता, दिनभर दहशत के साये में रहे लोग

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पन्ना

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Rajiv Jain

Oct 11, 2017

Tiger Sent back to Panna Tiger reserve From buffer Zone in MP

Tiger Sent back to Panna Tiger reserve From buffer Zone in MP

पन्ना. पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर जोन स्थित ग्राम विक्रमपुर में तीन दिन से डेरा जमाने वाला अद्र्ध व्यस्क बाघ आखिरकार रामबाहदुर हाथी के आगे कमजोर पड़ गया। तीसरे दिन मंगलवार को हाथी की मार के आगे थक हारकर वह जंगल की ओर भाग गया। मंगलवार की शाम करीब 5 बजे भारी भरकम वन अमला बाघ को जंगल की ओर खदेडऩे में सफल रहा। उसे आज दिनभर में कोई शिकार भी नहीं मिला था। इससे उसके भूखे होने की आशंका भी जताई जा रही थी। दिनभर की कड़ी मशक्कत के बाद शाम को जब बाघ जंगल की ओर भागा तो लोगों ने राहत की सांस ली। गौरतलब है, महज 18 माह का यह बाघ बड़ा ही ताकतवर और फुर्तीला था। इसके कारण दो दिन से वह रेस्क्यू टीम को परेशान कर रखा था। हाथियों की मदद से घेराबंदी कर पास पहुंने पर वह हाथियों पर ही झपट पड़ता था। दूसरे दिन के रेस्क्यू की शुरुआत भी सुबह करीब चार बजे से हुई। रेस्क्यू के शुरुआती चरण में पटाखे फोड़े गए और बैंड बजाकर उसे जंगल की ओर भगाने का प्रयास किया गया। लेकिन, उसकी धमक के आगे रेस्क्यू टीम की एक नहीं चल पा रही थी।

चलते-चलते ही खाया भोजन

रेस्क्यू टीम में लगे करीब 80 लोगों को कार्रवाई के दौरान दोपहर में भोजन करने के लिए भी समय नहीं मिल पा रहा था। इससे वाहन में सवार लोगों को वाहनों में और हाथियों में सवार लोगों को हथियों में ही भोजन के पैकेट पहुंचाए गए। जहां लोगों ने कारवाई के दौरान ही भेाजन भी खाया। भोजन के लिए रेस्क्यू की कार्रवाई को किसी प्रकार से प्रभावित नहीं होने दिया गया है। कार्रवाई के पूर्व चौकीदारों द्वारा आसपास के करीब एक दर्जन गांवों के लोगों को लकड़ी लेने या मवेशी चराने के लिए पास के जंगल में नहीं जाने की हिदायत दी गई है।

बाघ देखने पहुंचे आधा दर्जन गांव के लोग

गांव में बाघ को लेकर जहां एक ओर विक्रमपुर के लोग दहशत में थे, वहीं दूसरी ओर बाघ देखने के लिए आसपास के करीब आधा दर्जन गांव के सैकड़ों लोग पहुंचे हुए थे। इससे रेस्क्यू टीम को ग्रामीणों को संभालने के लिए डायल १०० में सूचना देने के साथ ही पुलिस को बुलाना पड़ा। रेस्क्यू क्षेत्र में जाने वाले मार्गों में करीब आधा दर्जन पुलिस बल तैनात किया गया था, जो ग्रामीणों को कार्रवाई क्षेत्र के समीप पहुंचने से रोक रहा था। इसके अलवा ग्रामीणों को घरों में रहने बच्चों को अकेला नहीं छोडऩे और घरों के दरवाजे और फाटक लगाकर रखने की हितायत दी गई थी।

मवेशी और फसलों का बनाया पंचनामा
कार्रवाई पूरी होने के बाद वन अधिकारी उन लोगों के घरों में पहुंचे जिनके मवेशियों को बाघ ने शिकार किया। इसी प्रकार रेस्क्यू की कार्रवाई के दौरान जिनकी फसलें बर्बाद हुई हैं उनके पंचनामा तैयार किए गए। अधिकारियों ने वन अमले को फसल को हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे कर जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।कार्रवाई में सहायक संचालक पन्ना, रेंजर एआर पांडेय, डिप्टी रेंजर एसके श्रीवास्तव प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

पहले दिन रहे नाकाम
पहले दिन के रेस्क्यू में दिनभर की भागदौड़ के बाद भी बाघ को भगाने में नाकाम रहने के बाद अधिकारियों ने दो और हाथी बुला लिए। इनमें पार्क के सबसे तेज तर्राट हाथियों में से एक रामबहादुर और केनकली को बुलाया गया था। मंगलवर को रेस्क्यू टीम की अग्रिम पंक्ति में राम बहादुर के साथ हथिनी केनकली, चंदा और रामकली साथ दे रही थीं। वाहनों की संख्या भी बढ़ाकर नौ कर दी गई थी। इसके साथ ही यहां 49 वनरक्षक, 20 चौकीदार, आधा दर्जन अधिकारी और पुलिस के जावान कार्रवाई में शामिल रहे। चारों हाथियों और वाहनों की टीम ने जब मजबूत घेरा बनाकर बाघ को छपट्टे मारना शुरू किया तो वह काफी समय तक इनसे जूझता रहा। लेकिन राम बहादुर के मजबूत मार के आगे उसकी एक भी नहीं चली और उसकी मार खाकर वह अंत में थक हार कर शाम करीब 5 बजे विक्रमपुर के ऊपर के जंगल की ओर भाग गया। कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे सहायक संचालक मडला आरएस सक्सेना ने बताया कि बाघ अब जल्दी नीचे नहीं आएगा। फि र भी गांव के लोगों को अहतिहात बरतने के लिए निर्देशित किया गया है।

rajiv jain IMAGE CREDIT: patrika