
Breastfeeding problems
कड़ों से पता चलता है कि स्तनपान के मामले में भारत का स्थान दक्षिण एशियाई देशों में काफी नीचे है। बमुश्किल 44 प्रतिशत महिलाएं ही प्रसव के बाद पहले घंटे में अपने शिशु को ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं। स्तनपान जच्चा-बच्चा दोनों के लिए फायदेमंद है। इसकी आदत डालने व सही तकनीक समझने में कुछ वक्त लग सकता है।
अहम भूमिका
एकल परिवारों में नई मां को स्तनपान कराने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। यदि समस्याएं बनी रहें तो ब्रेस्टफीड कराने से होने वाले लाभों को समझना व लैक्टेशन सलाहकार की मदद लेना अहम है। ऐसे सलाहकार स्तनपान कराने वाले विशेषज्ञ कहलाते हैं जो माताओं को ब्रेस्टफीड कराने के लिए प्रशिक्षित करते हैं। वे स्तनपान से जुड़ी दिक्कतों (दूध पिलाने में कठिनाई, दर्द का अनुभव व दूध कम उतरने आदि) में सहायता करती हैं।
दर्द की समस्या
ब्रेस्टफीडिंग के दौरान निपल्स में दर्द होना किसी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। एक वजह शिशु द्वारा गलत ढंग से दूध पीना भी हो सकती है। इससे मां को दर्द हो और वह फीड करना रोक रही हो।
ब्रेस्टफीडिंग से जुड़ी भ्रांतियां
ब्रेस्टफीडिंग से दर्द होता है, मां द्वारा खाई गई चीजों से शिशु को गैस हो सकती है व स्तनपान का एक टाइम टेबल होना चाहिए। इन भ्रांतियों को स्तनपान सलाहकार दूर कर सकती है।
तकलीफ पहचानना
एक स्तनपान सलाहकार यह तय कर सकता है कि दूध पिलाने की पोजीशन में गड़बड़ी है या कोई अन्य समस्या है। ऐसा भी हो सकता है कि शिशु के मुंह, तालु या जीभ में कोई दिक्कत हो। ये सलाहकार ऐसे मामलों में मां को किसी चिकित्सक से मिलने की सलाह दे सकता है। लैक्टेशन सलाहकार उन महिलाओं के लिए भी मददगार हो सकता है, जो दूसरी या तीसरी बार बच्चे को जन्म दे रही हैं।
प्रसव जटिलताएं
उन मामलों में स्तनपान कराना कठिन हो सकता है, जहां बिना किसी प्लानिंग के अचानक से सिजेरियन डिलीवरी करवानी पड़ी हो या प्रसव के दौरान मां को अत्यधिक रक्तस्त्राव हुआ हो। ऐसे में स्तनपान सलाहकार मां को बता सकता है कि शिशु को किस तरह से पोषण दिया जाना चाहिए।
सही सलाह
यदि कोई मां अपने शिशु की उचित देखभाल नहीं कर पा रही है तो सही सलाह न मिलना एक कारण है। इसलिए स्तनपान से जुड़े मुद्दों की पहचान करें ताकि समय रहते लैक्टेशन सलाहकार से मदद ले सकें। इससे स्तनपान कराने की प्रक्रिया में मदद मिलने से नवजात को पर्याप्त पोषण मिल सकेगा।
ब्रेस्ट सर्जरी
जिन महिलाओं ने आकार कम कराने या अन्य वजह से ब्रेस्ट सर्जरी कराई हो उन्हें ब्रेस्टफीडिंग में दिक्कत हो सकती है। उन्हें प्रसव से पहले लैक्टेशन सलाहकार से मिलना चाहिए। ताकि बाद में वे दूध की मात्रा का आकलन कर सके।
- डॉ. दीपा कनन
Published on:
26 Nov 2017 01:31 pm
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