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जब पैरेंट्स के सामने आने से कतराएं किशोर, कहीं नशा तो…

अक्सर किशोर भी पीयर प्रेशर के चलते नशे आदि में फंस जाते हैं।

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जब पैरेंट्स के सामने आने से कतराएं किशोर, कहीं नशा तो...

जब पैरेंट्स के सामने आने से कतराएं किशोर, कहीं नशा तो...

ऐसे बच्चों की पहचान करना है तो उनकी आदतों पर ध्यान रखें जैसे बार-बार बिना कारण पैसा मांग रहा है। पैरेंट्स के सामने आने पर कतराता है। जब पैरेंट्स घर में है तो बच्चा बाहर रहना ज्यादा पसंद करता है। बाहर से घर आता है तो सीधे अपने कमरे में जाते हैं। ऐसे में किशारों के व्यवहार पर ध्यान दें।

बच्चें से खुलकर करें बात

किशोर से खुलकर बात करें। उनके फ्रेंड सर्कल का ध्यान रखें। किशोर की बातों समर्थन करें और उन्हें नशीली चीजों से दूर रहने में सहायता करें। उन्हें नशीली चीजों का सेवन छोड़ने में मदद करने के लिए उनके साथ विभिन्न गतिविधियों में शामिल हों।

घर का माहौल टीनएज के लिए फ्रेंडली बनाकर रखें। ताकि किशोर अपने मन की बात खुलकर कर पाएं।

नशे में पड़े किशोरों पर कमेंट या गुस्सा करने की बजाय उसके समझाने की रणनीति अपनाएं।

किशोर को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करें। जब उसमें आगे बढ़ता है तो उसका हौसला बढ़ाएं।

किशोर के सामने उदाहरण स्थापित करें और उन्हें दिखाएं कि नशीली चीजों का सेवन करने से उनकी जिंदगी पर कैसा असर पड़ता है। इससे उसको नशीली चीजों के सेवन से बचने के लिए प्रेरणा मिलेगी।

अक्सर देखा गया है कि नशा छोड़वाने में भी दोस्त मदद करते हैं। वे मानसिक मजबूती देते हैं। ऐसे दोस्तों की पहचानकर उनसे भी मदद ले सकते हैं।

टीचर-स्कूलों की भूमिका भी ज्यादा

नशे की आदत किशोर अपने दोस्तों के साथ शुरू करते हैं। इसमें स्कूली दोस्त अधिक होते हैं। ऐेसे में स्कूल प्रशासन की भूमिका बढ़ जाती है। टीचर्स-स्कूल प्रशासन को चाहिए कि ऐसे बच्चों को चिह्नित करें। उनकी मॉनिटरिंग होनी चाहिए। पैरेंट्स को भी सूचित करें।

नशा एक बीमारी है

नशे की आदत एक तरह की बीमारी है। एक समय के बाद इसमें इलाज की जरूरत होती है। अगर किसी को ऐसी समस्या है तो मनोचिकित्सक को दिखाकर पूरा इलाज लें। नशे की लत छूट जाती है। इसके लिए प्रयास करें।


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