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बाहुबली सूरजभान सिंह चिराग के चाचा के भोज में पहुंचे, क्या रालोजपा का पुराना गुट फिर होगा एक?

Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव से बाहुबली सूरजभान सिंह रालोजपा छोड़ कर राजद में चले गए थे। लेकिन मकर संक्रांति के मौके पर वो पशुपति पारस के आवास पर आयोजित भोज में शामिल हुए। जिसके बाद एक बार फिर से दोनों के साथ आने की चर्चा शुरू हो गई है। 

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पटना

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Anand Shekhar

Jan 15, 2026

bihar politics

सूरजभान सिंह और पशुपति पारस (फोटो-पत्रिका)

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा का भोज एक सामान्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बहुत अहम मौका होता है। गुरुवार को ऐसा ही एक आयोजन राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस के घर पर हुआ। इस भोज में एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने सबको चौंका दिया। बाहुबली और पूर्व सांसद सूरजभान सिंह भी इस भोज में पहुंचे। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद यह उनकी पहली सार्वजनिक मुलाकात थी।

पुरानी कड़वाहट का अंत?

गुरुवार को पशुपति पारस के आवास पर दही-चूड़ा भोज के दौरान एक ऐसा नजारा सामने आया जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। पुरानी कड़वाहट और हाल की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को भुलाकर, सूरजभान सिंह और पशुपति पारस एक ही सोफे पर साथ बैठे दिखे।

सूरजभान सिंह और पशुपति पारस का रिश्ता दशकों पुराना है। जब राम विलास पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) बनाई थी, तो सूरजभान सिंह उनके सबसे भरोसेमंद साथियों में से एक थे। 2020 में LJP में बंटवारे के बाद, एक तरफ चिराग पासवान की LJP (राम विलास) थी और दूसरी तरफ पशुपति पारस की RLJP। उस समय, सूरजभान सिंह ने पशुपति पारस का साथ दिया था, लेकिन हाल के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले समीकरण बदल गए।

चुनाव से पहले छोड़ दी थी पार्टी

2025 के विधानसभा चुनाव से पहले सूरजभान सिंह ने पशुपति पारस की पार्टी राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) छोड़कर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ज्वाइन कर ली। उनकी पत्नी वीणा देवी ने RJD के टिकट पर मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। हालांकि, उन्हें JDU के बाहुबली अनंत सिंह के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा। इस चुनावी हार ने सूरजभान सिंह को अपनी रणनीति पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है। अब मकर संक्रांति का बहाना बनाकर, वह अपने पुराने खेमे में लौटते दिख रहे हैं।

क्या पुराना गुट फिर से एक होगा?

इस मुलाकात के अब सवाल उठ रहा है कि क्या RLJP का पुराना परिवार फिर से एक साथ आएगा। क्या पशुपति पारस, सूरजभान सिंह, चंदन सिंह और प्रिंस पासवान जैसे नेता एक बार फिर मजबूत मोर्चा बनाएंगे? दही-चूड़ा की दावत के दौरान सूरजभान सिंह द्वारा पशुपति पारस को दिए गए सम्मान और उनकी लंबी बातचीत ने RLJP के फिर से मजबूत होने की संभावना को बढ़ा तो दिया है। लेकिन अभी तक किसी भी स्तर पर औपचारिक बातचीत की पुष्टि नहीं हुई है। सूरजभान हमेशा पासवान परिवार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति रहे हैं। पारस हमेशा उन्हें चुनावी रणनीति में एक प्रभावशाली व्यक्ति मानते रहे हैं।

क्या बोले पारस?

इस दौरान RLJP अध्यक्ष पशुपति पारस ने सूरजभान सिंह पर कोई कमेंट नहीं किया, लेकिन पार्टी के भविष्य के बारे में उन्होंने कहा, "आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि पार्टी किसके साथ गठबंधन करेगी। बिहार चुनाव के नतीजे सभी के लिए पचाना मुश्किल है, इसीलिए RJD और कांग्रेस एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। मुझे लगता है कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा।"