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Ganga Boat Accident: गंगा में पलटी नाव, चीख-पुकार के बीच शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

Ganga Boat Accident:  पटना से सटे बाढ़ के उमानाथ गंगा घाट पर नाव पलटने से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग अब भी लापता हैं। नाव पर 15 लोग सवार थे, जो दियारा इलाके में सब्जी तोड़ने जा रहे थे।

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barh ganga boat accident

गंगा में पलटी नाव

Ganga Boat Accident पटना से सटे बाढ़ के उमानाथ गंगा घाट पर एक दर्दनाक नाव हादसे में दो लोगों की डूबने से मौत हो गई, जबकि पांच लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नाव पर करीब 15 लोग सवार थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, सभी लोग नाव से दियारा इलाके में सब्जी तोड़ने जा रहे थे। इसी दौरान तेज हवा के कारण नाव असंतुलित होकर पलट गई, जिससे नाव पर सवार सभी लोग गंगा नदी में डूब गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, आसपास मौजूद नाविकों की तत्परता से सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

गंगा हादसे में दो की मौत, पांच लापता

हादसे के बाद चलाए गए रेस्क्यू अभियान के दौरान एक महिला और एक युवक का शव नदी से बरामद किया गया है। वहीं, पांच लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है। घटना की सूचना मिलते ही बाढ़ थानाध्यक्ष ब्रजकिशोर सिंह, सीडीपीओ रामकृष्ण, एसडीएम गरिमा लोहिया और अंचलाधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह मौके पर पहुंच गए हैं। स्थानीय लोगों की मदद से राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। SDRF की टीम को भी मौके पर बुलाया गया है।

हादसे के कारणों पर उठ रहे सवाल

जिला प्रशासन के मुताबिक, मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। हादसे के शिकार अधिकांश लोग समस्तीपुर के रहने वाले बताए जा रहे हैं, जो परवल तोड़ने के लिए नदी पार कर बाढ़ क्षेत्र में गए थे। फिलहाल हादसे के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल पाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नाविक की लापरवाही के कारण यह दुर्घटना हुई, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि छोटी नाव पर क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने से नाव असंतुलित होकर पलट गई। बताया जा रहा है कि नाव पर किसी तरह के सुरक्षा या बचाव उपकरण भी मौजूद नहीं थे।

लापरवाही ने ली लोगों की जान?

इस हादसे के बाद गंगा नदी में सुरक्षित नाव परिचालन को लेकर प्रशासन के दावों पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दियारा क्षेत्र के खेतों में काम करने वाले मजदूर और किसान हर दिन नदी पार करते हैं और आने-जाने के लिए छोटी नावों का सहारा लेते हैं।

लोगों का कहना है कि अक्सर नावों पर उनकी क्षमता से अधिक सवारियां बैठा ली जाती हैं, लेकिन इसे रोकने या निगरानी करने वाला कोई नहीं होता। गुरुवार को भी ऐसी ही स्थिति बनी, जिसके बाद यह बड़ा हादसा हो गया। घटना के बाद गंगाघाट पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।