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झारखंड राज्य सभा चुनाव: कांग्रेस-JMM में उम्मीदवार को लेकर माथापच्ची, दिल्ली से रांची तक बढ़ी सियासी हलचल

झारखंड में राज्य सभा की दो सीटों के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। झामुमो-कांग्रेस गठबंधन दोनों सीटों पर जीत की रणनीति बना रहा है, जबकि पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के बावजूद भाजपा की एंट्री ने मुकाबले को रोचक बना दिया है।

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सांकेतिक तस्वीर। फोटो -(AI Generated)

झारखंड राज्यसभा चुनाव को लेकर रांची से लेकर दिल्ली तक सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होने हैं, जिनके लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), कांग्रेस और भाजपा अपने-अपने स्तर पर रणनीति बनाने में जुटी हैं।

दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए झामुमो को कांग्रेस के समर्थन की जरूरत है, वहीं कांग्रेस को भी एक सीट जीतने के लिए झामुमो का साथ जरूरी माना जा रहा है। दूसरी ओर, पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के बावजूद भाजपा की चुनावी दावेदारी ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

कांग्रेस तलाश रही जीताऊ चेहरा

झारखंड में झामुमो और कांग्रेस गठबंधन की सरकार है। कांग्रेस, झामुमो के समर्थन से राज्य सभा की एक सीट हासिल करना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक, इसको लेकर झामुमो की ओर से आंशिक सहमति भी मिल गई है। बताया जा रहा है कि इसके बाद कांग्रेस ने संभावित उम्मीदवारों की तलाश तेज कर दी है। पार्टी ऐसे चेहरे पर दांव लगाना चाहती है, जिस पर झामुमो के किसी विधायक को कोई आपत्ति न हो। फिलहाल दो नामों को लेकर चर्चा चल रही है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस पहले इन नामों पर झामुमो के साथ सहमति बनाने की कोशिश करेगी, उसके बाद ही उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

दिल्ली में लॉबिंग तेज

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, पार्टी राज्यसभा चुनाव के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर के नाम पर विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि इन दोनों नामों को झामुमो के सामने रखा जा सकता है। पार्टी के अंदर यह माना जा रहा है कि इन दोनों नेताओं के नाम पर झामुमो की ओर से सबसे कम आपत्ति हो सकती है।

सूत्रों का कहना है कि झामुमो इन दोनों में से किसी एक नाम पर सहमति दे सकता है। इसी बीच दोनों नेता अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए फिलहाल दिल्ली में कैंप कर रहे हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से लगातार मुलाकात कर रहे हैं।

कांग्रेस इस बार ऐसा उम्मीदवार उतारना चाहती है, जिसे लेकर गठबंधन के भीतर किसी तरह का असंतोष न हो और पार्टी विधायक भी पूरी मजबूती के साथ समर्थन करें। वहीं, चुनाव में भाजपा की दावेदारी को देखते हुए महागठबंधन काफी सोच-समझकर रणनीति तैयार कर रहा है।