
बिहार में नदियों का बढ़ा जल स्तर। (फाइल फोटो, जल संसाधन विभाग)
बिहार में कोसी नदी को "बिहार का शोक" कहा जाता है, क्योंकि यह नदी हर साल विनाशकारी बाढ़ लाती है, जिससे जानमाल और संपत्ति का भारी नुकसान होता है। कोसी नदी नेपाल से निकलकर बिहार में प्रवेश करती है और गंगा नदी में मिल जाती है। केंद्रीय जल आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इसका जलस्तर अभी भी बिहार के खगड़िया के बालतारा में कोसी नदी 76 सेमी ऊपर बह रही। जिसमें कमी आने के संकेत हैं। इसी तरह से कटिहार के कुरसेला में कोसी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 75 सेमी ऊपर बह रही थी। लेकिन अब उसका पानी उतरने लगा है। दरअसल, कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने से बिहार का मधुबनी, सहरसा, सुपौल, कटिहार, खगड़िया और दरभंगा का एक बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में आता है।
दरअसल, कोसी नदी से जिन छह जिला के लोग बाढ़ से प्रभावित होते हैं उनमें से अधिकांश सीटों पर वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को जीत मिली थी। छह जिला के 34 विधानसभा सीटों में 26 पर NDA और 8 पर महागठबंधन जीती थीं। कांग्रेस नेता असित नाथ तिवारी सोमवार को कोसी बराज के रखरखाव के लिए 27 करोड़ 78 लाख 54 हजार 336 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति पर तंज कसते हुए कहते हैं कि सरकार को चुनाव सर पर है ती इसकी क्यों याद आई? क्या पिछले पांच साल से इसकी जरूरत नहीं थी? अगर नहीं थी तो इसकी घोषणा अभी क्यों और थी तो चुनाव के समय सरकार ऐसा कर क्या बताना चाह रही है?
दरअसल, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को कोसी बराज के 66 गेटों, होइस्टिंग अरेंजमेंट, ईओटी, मोनो क्रेन और संबंधित यांत्रिक उपकरणों के रखरखाव और मरम्मत के लिए सरकार ने 27 करोड़ 78 लाख 54 हजार 336 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति की जानकारी दी है। उनके अनुसार यह स्वीकृति अगले पांच वर्षों (2025 से 2030) तक गेटों और संबंधित संरचनाओं के संचालन, अनुरक्षण, रख-रखाव और मरम्मत के कार्यों के लिए दी गई है।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि विभागीय बजट के अंतर्गत मरम्मत एवं अनुरक्षण मद में 4320.66 लाख रुपये का प्रावधान है। अब इस स्वीकृति के बाद 2778.54 लाख रुपये इस योजना पर खर्च किए जाएंगे। पहले खर्च का अनुमान 48.55 करोड़ रुपये था। लेकिन बाद में इसे घटाकर बजट के हिसाब से ठीक कर दिया गया है। इस योजना के तहत गेटों, प्लेटफॉर्म, पेंटिंग, होइस्टिंग सिस्टम और अन्य उपकरणों का रखरखाव और मरम्मत की जाएगी। निविदा प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी, ताकि कार्य तय समयसीमा में पूरा हो सके।
इस परियोजना के पूरा होने से कोसी बराज के गेटों का कुशल संचालन सुनिश्चित होगा और उनकी दीर्घकालिक सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। यह कदम बिहार के किसानों और प्रदेश के सिंचाई तंत्र के लिए बेहद अहम है। इससे आने वाले वर्षों में कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और जनसुरक्षा को भी लाभ पहुंचेगा।
चौधरी ने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार लगातार किसानों के हित के लिए काम कर रही है। 2005 की तुलना में बिहार में सिंचाई के लिए मजबूत नेटवर्क तैयार हुआ है। इसी कड़ी में कोसी बराज के 66 गेटों, होइस्टिंग अरेंजमेंट, ईओटी, मोनो क्रेन और संबंधित यांत्रिक उपकरणों के रखरखाव और मरम्मत के लिए सरकार ने 27.78 करोड़ रुपये (2778.54 लाख) की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है।
Published on:
19 Aug 2025 06:00 am
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