प्रियरंजन भारती
पटना। जदयू अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने जिस शराबबंदी अभियान को लेकर अपनी ही पीठ थपथपाकर शाबासी बटोर रहे हैं, वास्तव में उसकी हवा निकलाने में पुलिस-प्रशासन कोई कसर नहीं छोड़ रहा। सरकार ने नए शराबबंदी कानून को लागू करने के लिए पुलिस को पूरी छूट दे रखी है। पर पुलिस वाले कितनी ईमानदारी से इस पर अमल कर रहे इसके नमूने आए दिन सामने आने लगे हैं।
पटना के सीनियर एसपी मनु महाराज ने जिले के दुल्हिन बाजार थानेदार को इसलिए सस्पेंड कर दिया कि जब्त की गई शराब के डेढ़ सौ कार्टून उसने दबा कर रख लिए थे। दरअसल कुछ रोज पहले दुल्हिन बाजार में एक ट्रक शराब जब्त की गई थी। दुल्हिन बाजार थाने की पुलिस ने जब्त शराब के मात्र २९५ कार्टून शराब दस्तावेजों में दिखाए और डेढ़ सौ कार्टून को थाने में ही छिपाकर रख लिया। थाने के ही एक सहकर्मी ने एक आला अधिकारी को इसकी सूचना दे दी।
उसने यह भी बता दिया कि शराब के कार्टून मालखाने की तरफ छिपाकर रखे गए हैं। सीनियर एसपी ने मामले की जांच कार्रवाई तो मालखाने के पास शराब के डेढ़ सौ कार्टून पकड़े गए। इस सच के सामने आते ही थानेदार अखिलेश कुमार को सस्पेंड कर दिया गया। हालांकि अखिलेश कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि छठ पर्व के चलते सभी बोतलों की गिनती नहीं हो पाई थी। जबकि सीजर में ४४७ कार्टून शराब का जिक्र किया गया।
यहां यह भी जानना दिलचस्प होगा कि शराबबंदी के बाद सूबे में शराब की खपत कम होने की जगह कहीं और बढ़ गई लगती है। आए दिन शराब से भरे ट्रक और वाहन जब्त किए जा रहे हैं। जब्त शराब की गिनती पुलिस के ही हाथों में है। सवाल उठता है कि जब्त की गई शराब की बोतलों में से संबंधित पुलिस टीम ने कितनी जब्ती दिखाई और कितनी गायब कर दी यह उस टीम के ऊपर ही निर्भर है। इस पर और कोई नियंत्रण नहीं है। फिर यह भी कम रोचक नहीं कि शराब की खेपों भरै कार्टूनों वाले ट्रक कहा से आ रहे हैं।
क्या इन्हें टॉल केन्द्रों पर नहीं पता लगाया जाता या कोई निर्धारित रकम देकर इन्हें जाने दिया जाता है। तीसरी प्रमुख बात यह भी है कि शराब की खेपें अधिकांशत: हरियाणा की शराब निर्माता कंपनी की होती हैं। तो क्या दबी छुपी जुबान से कही जा रही इस बात में दम है कि सत्ताधारी गठबंधन के एक बड़े नेता की शराब निर्माता कंपनी से ही सप्लाई कराई जा रही और सत्ता की हनक में अवैध शराब का धंधा बखूबी चल रहा है। शराब की बिक्री चोरी छिपे बड़ी कीमत पर जारी है और इसमें सत्ता संलिप्तता भी शक के दायरे में है।
गांवों में शराब की लत वाले रसूदार लोगों को पुलिस की आंख-मिचौली के बीच शराब बदस्तूर मिल रही और वे हर रोज मजे ले रहे हैं। इसका नजारा इस संवाददाता ने वैशाली जिले के एकगांव पुरखौली में आंखों से देखा जहां जलेश्वर नामक व्यक्ति चौगुनी कीमत पर शराबखोरी की लत को हर रोज बरकरार रखते हुए मजे ले रहा। इन सवालों पर बेशक सरकार मौन है पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमर शराबबंदी का श्रेय लेने में पीछे नहीं है।