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Bihar Politics: ‘मोदी को हटाने वाले अब कैबिनेट में?’ शिवानंद तिवारी ने नीतीश कुमार पर कसा तंज

Bihar Politics: समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी ने नीतीश कुमार के नरेंद्र मोदी के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने की अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे भारतीय राजनीति का “दिलचस्प मोड़” बताया है। उन्होंने कहा कि एक समय नीतीश कुमार को मोदी का राजनीतिक विकल्प माना जाता था, लेकिन अब उनके ही मंत्रिमंडल में शामिल होने की चर्चा है।
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नीतीश कुमार पीएम मोदी और शिवानंद तिवारी

नीतीश कुमार पीएम मोदी और शिवानंद तिवारी

Bihar Politics: नीतीश कुमार के नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल होने की अटकलों के बीच समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि एक समय ऐसा था जब नीतीश कुमार को नरेंद्र मोदी के राजनीतिक विकल्प के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब खबरें हैं कि वे ही नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल का हिस्सा बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है तो यह भारतीय राजनीति का एक दिलचस्प मोड़ माना जाएगा।

एक मंच से दूरी से लेकर कैबिनेट तक

शिवानंद तिवारी ने आगे लिखा कि उन्होंने विजय चौधरी का बयान देखा, जिसमें नीतीश कुमार के केंद्र सरकार में शामिल होने की संभावना जताई गई है। उनके अनुसार, यदि यह सही साबित होता है तो यह नीतीश कुमार की लंबी राजनीतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण और अंतिम पड़ाव जैसा प्रतीत होगा। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि जिस नेता ने कभी पूरे देश में घूम-घूमकर नरेंद्र मोदी को सत्ता से हटाने का अभियान चलाया था, वही अब उनके मंत्रिमंडल का हिस्सा बनने की स्थिति में दिखाई दे रहा है।

शिवानंद का नीतीश–मोदी पर तीखा बयान

शिवानंद तिवारी ने आगे लिखा कि नीतीश कुमार उनके पुराने साथी रहे हैं और कभी वे साथ-साथ राजनीति किया करते थे। उन्होंने बताया कि उन दिनों देश की राजनीति पर चर्चा के दौरान वे मज़ाक-मज़ाक में नीतीश कुमार से कहते थे कि यदि कभी वे प्रधानमंत्री बनें, तो उनके जैसे व्यक्ति को भी अपने मंत्रिमंडल में गृह मंत्री बनने का अवसर मिल सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल मित्रों के बीच होने वाली हल्की-फुल्की बातचीत थी।

‘सिद्धांतहीन राजनीति’ पर शिवानंद तिवारी का तंज

शिवानंद तिवारी ने आगे लिखा कि महात्मा गांधी ने सात सामाजिक पापों का उल्लेख किया था, जिनमें पहला “सिद्धांतहीन राजनीति” है। उन्होंने कहा कि पिछले 15–20 वर्षों के राजनीतिक घटनाक्रम को देखें तो यह बदलाव कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने यह भी कहा कि एक समय ऐसा था जब नीतीश कुमार, नरेंद्र मोदी के साथ एक मंच पर या पोस्टर में भी अपनी तस्वीर नहीं देखना चाहते थे। उन्होंने 2010 में पटना में हुई भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय नीतीश कुमार ने कार्यसमिति सदस्यों को मुख्यमंत्री आवास पर भोज के लिए आमंत्रित किया था।

नीतीश–मोदी मंच विवाद

शिवानंद तिवारी के अनुसार, उस समय नरेंद्र मोदी भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य थे। उन्होंने आगे कहा कि कोसी नदी के तटबंध टूटने के बाद आई आपदा के दौरान कई राज्य सरकारों, जिनमें गुजरात सरकार भी शामिल थी, ने बिहार को आर्थिक सहायता दी थी। उस सहायता को गुजरात सरकार ने होर्डिंग्स के माध्यम से प्रचारित किया, जिससे नीतीश कुमार नाराज़ हो गए थे। इसके बाद, उनके अनुसार, नीतीश कुमार ने न केवल गुजरात सरकार की सहायता राशि लौटाने का निर्णय लिया, बल्कि उसी समय राष्ट्रीय कार्यकारिणी के भोज को भी रद्द कर दिया था। कहा जाता है कि यह निर्णय उस भोज में नरेंद्र मोदी की संभावित उपस्थिति को लेकर लिया गया था।

राजनीति की विडंबना

शिवानंद तिवारी ने आगे कहा कि वहीं से शुरू हुई राजनीतिक यात्रा आज इस मोड़ पर पहुँचती दिखाई दे रही है, जहाँ चर्चा है कि नीतीश कुमार अब नरेंद्र मोदी के साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है, तो यह भारतीय राजनीति की एक बड़ी विडंबना होगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके और नीतीश कुमार के बीच राजनीतिक मतभेद रहे हैं, लेकिन व्यक्तिगत संबंध हमेशा सौहार्दपूर्ण रहे हैं। उन्होंने नीतीश कुमार को अपना पुराना मित्र बताते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।