
रेयर अर्थ मिनरल्स (सांकेतिक तस्वीर)
Bihar Rare Earth Minerals: साल 2000 में झारखंड के अलग होने के बाद माना जाता था कि बिहार के पास खनिज संपदा के नाम पर कुछ खास नहीं बचा है और राज्य पूरी तरह सिर्फ खेती पर निर्भर हो गया है। लेकिन हाल के वैज्ञानिक सर्वेक्षणों में बिहार में दुर्लभ और बेशकीमती खनिजों का भंडार मिला है, जिसकी मांग पूरी दुनिया के रक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा है। राज्य के खान एवं भू-तत्व मंत्री प्रमोद कुमार ने बताया है कि बिहार के कई जिलों में रेयर अर्थ एलिमेंट्स और बेहद कीमती रणनीतिक खनिजों के बड़े भंडार मिले हैं, जिनके व्यावसायिक खनन की प्रक्रिया अब बेहद जल्द शुरू होने जा रही है।
खान मंत्री प्रमोद कुमार के मुताबिक केंद्र सरकार ने बिहार के अलग-अलग जिलों में महत्वपूर्ण और दुर्लभ खनिजों के कुल 14 बड़े ब्लॉकों की पहचान की है। इन खनिजों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी कीमत है। चिन्हित किए गए ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया शुरू करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी मेटल स्क्रैप ट्रेड कॉरपोरेशन ने पहले ही बोलियां आमंत्रित कर ली हैं। 20 मई के बाद इन सभी खजाने वाले ब्लॉकों की आधिकारिक नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, जिसके बाद देश-विदेश की बड़ी माइनिंग कंपनियां बिहार का रुख करेंगी।
प्रमोद कुमार के अनुसार, बिहार के दक्षिणी हिस्से और झारखंड से सटे सीमावर्ती जिलों में खनिज संपदा का बड़ा नेटवर्क मिला है। भागलपुर के बटेश्वरस्था में रेयर अर्थ एलिमेंट्स के बेहद मजबूत संकेत मिले हैं, साथ ही क्रोमाइट खनिज मिलने की भी भारी संभावना है। वहीं, बांका के पिंडारक क्षेत्रमें कोबाल्ट और तांबे के बड़े भंडार मिले हैं। कोबाल्ट ब्लॉक की नीलामी की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है।
जमुई का सोनो इलाका पहले से ही सोने के भंडार के संकेतों के लिए चर्चा में रहा है। मंत्री ने बताया कि यहां अत्याधुनिक हवाई और सैटेलाइट सर्वे का काम जारी है और अंतिम रिपोर्ट आते ही इस पर बड़ा फैसला होगा। इसी तरह नवादा के सपनेरी ब्लॉक में वैनाडियम युक्त मैग्नेटाइट और इल्मेनाइट के खनन ब्लॉक मिले हैं, जबकि रोहतास के नवाडीह, टिपा और शाहपुर क्षेत्र में ग्लॉकोनाइट के तीन बड़े ब्लॉकों की नीलामी होने जा रही है।
भागलपुर और अन्य जिलों में मिले रेयर अर्थ एलिमेंट्स असल में 17 प्राकृतिक धात्विक तत्वों का एक समूह होते हैं जैसे लैंथेनम, सेरियम, नियोडाइमियम आदि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में इन खनिजों को भविष्य का ईंधन और आधुनिक तकनीक की रीढ़ माना जाता है। इनका उपयोग कई आधुनिक उपकरणों को बनाने में किया जाता है। जैसे कि मिसाइल गाइडेंस सिस्टम, एडवांस्ड रडार, लड़ाकू विमान, ड्रोन स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी स्क्रीन, हार्ड डिस्क, हाई-एंड कैमरा लेंस, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की बैटरियां, मोटर और विंड टर्बाइन आदि।
इसके अतिरिक्त नवादा में मिले इल्मेनाइट से टाइटेनियम धातु प्राप्त होती है जिसका इस्तेमाल एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में होता है, जबकि रोहतास में मिले ग्लॉकोनाइट का उपयोग प्राकृतिक पोटेशियम उर्वरक के रूप में खेती को समृद्ध करने के लिए किया जाएगा।
बिहार और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में खनिजों की सटीक मैपिंग के लिए सरकार किसी पुरानी पद्धति पर निर्भर नहीं है। खान मंत्री प्रमोद कुमार ने बताया कि विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर खनिज अन्वेषण की गतिविधियां चलाई जा रही हैं। इसके लिए उच्च-तकनीकी हवाई सर्वेक्षण, उपग्रह चित्रण, हिस्टोरिकल डेटा एनालिसिस और जमीन पर सघन वैज्ञानिक अध्ययन किए जा रहे हैं। इसी आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कारण बिहार की धरती के भीतर छिपे इस खजाने का पता चल पाया है।
Published on:
19 May 2026 06:22 pm
बड़ी खबरें
View Allपटना
बिहार न्यूज़
ट्रेंडिंग
