14 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Bihar Politics: नई सरकार में डिप्टी सीएम बनेंगे निशांत कुमार? जानें कहां फंसा है असली पेंच

बिहार की नई सरकार में निशांत कुमार डिप्टी सीएम पद की शपथ ले सकते हैं। उनके साथ विजय कुमार चौधरी के भी उपमुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है।

2 min read
Google source verification
Nitish Kumar, Nishant Kumar,

नीतीश कुमार, निशांत कुमार (फोटो- Bihari Man एक्स पोस्ट)

Bihar Politics पटना में नई सरकार के गठन से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। नीतीश कुमार के इस्तीफे की चर्चाओं के बीच सरकार गठन के फॉर्मूले को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, निशांत कुमार डिप्टी सीएम बनने के लिए तैयार हो गए हैं। जदयू कोटे से नई सरकार में दो डिप्टी सीएम शपथ ले सकते हैं। वहीं, मंत्रिमंडल में बीजेपी कोटे से 14 और जदयू कोटे से 15 मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। चिराग पासवान की पार्टी से भी दो मंत्री शामिल किए जा सकते हैं। हालांकि, बिहार विधानसभा अध्यक्ष पद को लेकर अब भी पेंच फंसा हुआ है। जदयू इस पद पर किसी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं दिख रही है।

नई सरकार से पहले जदयू की शर्तें

सूत्रों के अनुसार, नई सरकार के गठन से पहले जदयू ने कई मुद्दों पर बीजेपी से अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। जदयू ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष पद पर भी दावा ठोंक दिया है। जदयू सूत्रों का कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष पद उनके पास रहने से भविष्य में किसी भी राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति में उनका पलड़ा मजबूत रहेगा। यही वजह है कि पार्टी इस पद को लेकर गंभीरता से अपना दावा कर रही है।

हरिवंश को राज्यसभा भेजने पर जदयू नाराज

सूत्रों के अनुसार, हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा भेजे जाने के फैसले से जदयू सबसे ज्यादा नाराज है। पार्टी का कहना है कि यदि बीजेपी को उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजना ही था, तो इस पर जदयू से पहले विचार-विमर्श करना चाहिए था। हालांकि, जदयू का आरोप है कि बीजेपी ने बिना किसी चर्चा के सीधे उन्हें राज्यसभा भेज दिया। जदयू नेताओं का यह भी कहना है कि जो हरिवंश पार्टी की कई अहम बैठकों से अनुपस्थित रहे और जिन्हें जदयू ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी से भी बाहर कर दिया था, उन्हें राज्यसभा भेजकर बीजेपी क्या संदेश देना चाहती है। पार्टी के मुताबिक, इससे यह संकेत जाता है कि जिसे जदयू बाहर का रास्ता दिखाना चाह रही थी, उसी को बीजेपी ने राज्यसभा भेजकर मानो पुरस्कृत किया है।