
Stray dogs (Photo- Patrika)
Bihar News:बिहार के सासाराम में अब सरकारी स्कूल के शिक्षकों पर आवारा कुत्तों को भगाने की जिम्मेदारी आ गई है। सासाराम नगर निगम ने शहर के सभी सरकारी स्कूलों को निर्देश जारी कर आवारा कुत्तों पर नजर रखने को कहा है। इस काम के लिए हर स्कूल में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश जारी किया गया है। इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट में चल रहे एक मामले का हवाला दिया गया है।
सासाराम नगर निगम द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में नगर निगम क्षेत्र के प्राइमरी, मिडिल, सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्रिंसिपल को एक स्टाफ सदस्य को नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है। यह नोडल अधिकारी नगर निगम को स्कूल परिसर और उसके आसपास घूमने वाले आवारा कुत्तों की संख्या, स्थिति और गतिविधियों के बारे में जानकारी देगा।
नगर निगम का कहना है कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट में चल रही स्वतः संज्ञान रिट याचिका संख्या 5/2025, “शहर आवारा कुत्तों से परेशान, बच्चे चुका रहे कीमत” में दिए गए आदेश के पालन में उठाया गया है, जिसमें बच्चों की सुरक्षा के लिए आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के उपाय करने का निर्देश दिया गया था।
इस आदेश के सामने आते ही शिक्षकों के बीच नाराजगी साफ नजर आने लगी है।शिक्षकों का कहना है कि पहले ही उनसे पढ़ाई के अलावा जनगणना, बीएलओ, जाति गणना, चुनाव ड्यूटी जैसे गैर-शैक्षणिक कार्य कराए जाते हैं और अब आवारा कुत्तों की जिम्मेदारी भी थमा दी गई है।
बढ़ते विवाद को देखते हुए, नगर निगम के नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि नोडल अधिकारी का शिक्षक होना जरूरी नहीं है। स्कूल का कोई भी स्टाफ सदस्य, जैसे क्लर्क या चपरासी इस जिम्मेदारी के लिए नियुक्त किया जा सकता है। हेडमास्टर को सिर्फ निर्धारित फॉर्मेट में नोडल अधिकारी का नाम, पदनाम और मोबाइल नंबर देना है।
नगर निगम का तर्क है कि शहर में डॉग पाउंड और आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने की योजना बनाई जा रही है, और इसके लिए सटीक डेटा की जरूरत है। स्कूलों को इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि वहां बड़ी संख्या में बच्चे होते हैं और उनकी सुरक्षा सबसे जरूरी है।
Published on:
07 Jan 2026 02:58 pm
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