
NDA विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी
Bihar New CM:बिहार की सियासत में दशकों तक छोटे भाई की भूमिका निभाने वाली भारतीय जनता पार्टी ने अब बिहार की कमान सीधे अपने हाथ में ली है। बिहार में पहली बार भाजपा का सीएम बनेगा और ये होंगे सम्राट चौधरी। तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए भाजपा विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को नेता चुना गया, जिसके बाद एनडीए की संयुक्त बैठक में उनके नाम पर अंतिम मुहर लगा दी गई। इस दौरान सबसे भावुक और चर्चा का विषय वह पल रहा जब सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया और नीतीश कुमार ने उन्हें माला पहनाकर एनडीए का नेतृत्व सौंपा।
भाजपा विधायक दल की बैठक में दूसरे डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा था। इसके तुरंत बाद सेंट्रल हॉल में हुई एनडीए के पांचों घटक दलों की बैठक में नीतीश कुमार ने खुद सम्राट चौधरी को एनडीए विधायक दल का नेता बनाने का प्रस्ताव पेश किया। सभी विधायकों ने मेज थपथपाकर और नारों के साथ इस प्रस्ताव का अनुमोदन किया। सम्राट चौधरी अब राज्यपाल सैयद अता हसनैन के पास जाकर नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। इसके बाद 15 अप्रैल (बुधवार) सुबह 11:00 बजे लोक भवन में शपथ ग्रहण समारोह होगा।
सम्राट ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल से की थी। आज वही बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में इतिहास रचने जा रहा है। सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर के लखनपुर गांव में हुआ। उन्हें राजनीति विरासत में मिली। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति के 'भीष्म पितामह' कहे जाते हैं, जिन्होंने समता पार्टी की स्थापना में नीतीश कुमार का साथ दिया था। पिता 7 बार विधायक और सांसद रहे, तो माता पार्वती देवी ने भी सदन में अपनी जगह बनाई। सम्राट ने बचपन से ही राजनीति की उठापटक और 'लव-कुश' समीकरणों को करीब से देखा था।
सम्राट चौधरी का वास्तविक नाम राकेश कुमार है। उनके सियासी सफर की शुरुआत 1990 के दशक में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से हुई। 1999 में जब उनके पिता ने राबड़ी देवी की सरकार को समर्थन दिया, तब लालू यादव ने महज 31 साल की उम्र में उन्हें कृषि मंत्री बनवा दिया। वह उस वक्त के सबसे युवा मंत्री थे। हालांकि, उनकी उम्र को लेकर इतना विवाद हुआ कि मामला राज्यपाल और चुनाव आयोग तक पहुंच गया था, लेकिन इस घटना ने उन्हें पूरे बिहार में पहचान दिला दी।
लालू का साथ छोड़ने के बाद सम्राट चौधरी नीतीश कुमार के करीब आए। 2014 में जब नीतीश ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए जीतन राम मांझी को सीएम बनाया, तब सम्राट ने मांझी का समर्थन किया और शहरी विकास मंत्री बने। लेकिन नीतीश कुमार के साथ उनके वैचारिक मतभेद गहराते गए। उन्होंने महसूस किया कि बिहार की राजनीति में पिछड़ों और अति-पिछड़ों को एक नया, आक्रामक नेतृत्व चाहिए।
2017 में सम्राट चौधरी भाजपा में शामिल हुए। यह वह मोड़ था जिसने उनकी तकदीर बदल दी। भाजपा ने उन्हें हाथों-हाथ लिया क्योंकि पार्टी को एक ऐसे कुशवाहा (कोइरी) चेहरे की तलाश थी जो नीतीश के लव-कुश किले में सेंध लगा सके।
नीतीश ने जब एनडीए का साथ छोड़कर राजद के साथ सरकार बनाई तो सम्राट चौधरी ने सिर पर मुरैठा बांधा और कसम खाई कि जब तक नीतीश कुमार को सत्ता से नहीं हटा देंगे, तब तक पगड़ी नहीं खोलेंगे। हालांकि, बाद में समीकरण फिर बदला और नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ सरकार बनाई, जिसमें सम्राट चौधरी डिप्टी सीएम बनें। मार्च 2023 में उन्हें बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, जहां उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूंकी।
Updated on:
14 Apr 2026 05:46 pm
Published on:
14 Apr 2026 03:57 pm
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