
बिहार के वित्त, उद्योग और कृषि मंत्री (फोटो- dilip jaiswal FB)
Bihar News: पटना के अधिवेशन भवन में गुरुवार को राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) बिहार की 95वीं त्रैमासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में बिहार सरकार के वित्त, उद्योग और कृषि विभाग से जुड़े मंत्रियों के साथ कई बड़े बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक का उद्देश्य राज्य में औद्योगिक विकास, निवेश को बढ़ावा देने और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के तहत लाभुकों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने की समीक्षा करना था। इस बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मंत्रियों ने बैंकों पर नाराजगी जताई।
बैठक के बाद उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने बैंकों की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि बैठक में साफ तौर पर यह सामने आया है कि कई बैंक राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं को जमीन पर लागू करने में विफल साबित हो रहे हैं। उद्यमियों और आम लोगों को न तो समय पर ऋण मिल रहा है और न ही योजनाओं का पूरा लाभ। उद्योग मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह लापरवाही बिहार के विकास के लिए बेहद खतरनाक है और बैंकों को अपनी कार्यशैली में तुरंत सुधार करना होगा।
बैठक के बाद वित्त मंत्री विजेंद्र यादव ने बताया कि बैंकों के कामकाज की निगरानी के लिए एक विशेष कमेटी का गठन कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि यह कमेटी यह देखेगी कि बैंक राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं को किस हद तक ईमानदारी से लागू कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने स्पष्ट कहा कि अगर बैंक आगे भी लापरवाही बरतते पाए गए, तो सरकार कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।
कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने भी बैठक के बाद बैंकों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बैंकों का रवैया बिहार के प्रति सौतेलेपन जैसा है। कृषि मंत्री का आरोप था कि बैंक किसानों, छोटे व्यापारियों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अपेक्षित ऋण नहीं दे रहे हैं, जिससे कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बिहार को विकसित राज्य बनाना चाहते हैं, लेकिन बैंकों का सहयोग नहीं मिलने से विकास की रफ्तार बाधित हो रही है।
मंत्रियों के भड़कने का मुख्य कारण बैंकों द्वारा बिहार के उद्यमियों और किसानों को समय पर सुलभ ऋण (Loan) उपलब्ध न कराना है। इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में बैंकों का ढुलमुल रवैया और फाइलों के निपटारे में होने वाली देरी ने भी आग में घी का काम किया। साथ ही, सरकारी विभागों और बैंकिंग तंत्र के बीच बेहतर समन्वय की कमी के कारण विकास योजनाएं जमीन पर नहीं उतर पा रही हैं, जिसे मंत्रियों ने बिहार के साथ 'सौतेला व्यवहार' और 'खतरनाक लापरवाही' करार दिया है।
बैठक में यह बात भी सामने आई कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री उद्यमी योजना, कृषि ऋण और औद्योगिक निवेश से जुड़ी कई योजनाओं में बैंक लक्ष्य के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। मंत्रियों ने इसे गंभीर चूक बताते हुए बैंकों से जवाब मांगा।
Updated on:
22 Jan 2026 05:11 pm
Published on:
22 Jan 2026 05:10 pm
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