“आप दिल्ली से पटना क्यों लौट आए?” इस सवाल पर उन्होंने माथे का पसीना पोंछते हुए कहा, “वहाँ गैस नहीं मिल रही थी, इसलिए वापस आना पड़ा। दिल्ली में जो छोटा सिलेंडर पहले 10-12 दिन चल जाता था, अब वह बाजार में 300-350 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिल रहा है। जब काम अच्छा रहता है, तो मैं रोज़ 600-650 रुपये कमा लेता हूँ, लेकिन किराया, खाने-पीने का खर्च और घर पैसे भेजने के बाद कुछ भी नहीं बचता। यहाँ कम से कम गाँव में लकड़ी या गोबर के उपलों से चूल्हा जलाकर काम चला सकते हैं।”