
सुशील मोदी को श्रद्धांजलि देते नीतीश कुमार (फोटो- X @ Nitish Kumar)
पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में सोमवार को दिवंगत भाजपा नेता सुशील मोदी की जयंती के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जहां उनकी पत्नी जेसी मोदी ने भावुक माहौल के बीच बिहार की राजनीति से जुड़ा उस वक्त का किस्सा साझा किया, जब नीतीश कुमार ने एनडीए का साथ छोड़ दिया था और राजद के साथ महागठबंधन बना लिया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दोबारा एनडीए में लौटने के पीछे सुशील मोदी की भूमिका बेहद अहम रही।
जेसी मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत बेहद सादगी से की। उन्होंने कहा, "मैं नेताओं की तरह भाषण नहीं दे सकती, लेकिन सुशील जी के जीवन में कौन और क्या महत्वपूर्ण था, यह जरूर बता सकती हूं।" उन्होंने कड़ाके की ठंड में आए कार्यकर्ताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि सुशील जी के जीवन में कार्यकर्ता टॉप मोस्ट थे। मंत्री और नेता बाद में, पहले वे अपने कार्यकर्ताओं और उनके सुझावों पर ध्यान देते थे।
जेसी मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सुशील मोदी के बीच के तालमेल की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि नीतीश जी का विजन और सुशील जी के आइडियाज ने बिहार को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया। उन्होंने अपने संबोधन में उस राजनीतिक दौर को याद किया, जब नीतीश कुमार ने एनडीए छोड़कर दूसरा गठबंधन बना लिया था। उन्होंने कहा कि उस समय सुशील मोदी और भी ज्यादा सक्रिय हो गए थे। वे सरकार की नीतियों और फैसलों को तथ्यों के साथ जनता के सामने रखते थे और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार की आलोचना करते थे।
जेसी मोदी के मुताबिक, सुशील मोदी की वजह से राजनीतिक दबाव और परिस्थितियां ऐसी बनीं कि नीतीश कुमार को दोबारा भाजपा और एनडीए के साथ आना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस पूरे दौर में सुशील मोदी की भूमिका बेहद निर्णायक थी, लेकिन उन्होंने कभी इसका श्रेय खुद नहीं लिया। वे चुपचाप पार्टी और लोकतंत्र के हित में काम करते रहे।
जेसी मोदी ने बताया कि सुशील मोदी की सबसे बड़ी खासियत उनका अनुशासन था। समय की पाबंदी, कार्यक्रमों की तैयारी और किए गए वादों को निभाने के मामलों में वे कभी समझौता नहीं करते थे। अगर किसी से कह दिया कि आ रहे हैं, तो हर हाल में समय पर पहुंचते थे। यही वजह थी कि पार्टी और सरकार, दोनों जगह उनकी बात को गंभीरता से लिया जाता था।
उन्होंने कहा कि जो भी सुशील मोदी से मिलने आता था, चाहे कोई समस्या लेकर या कोई नया सुझाव लेकर, वह ध्यान से सुनते थे और तुरंत जरूरी बातें नोट कर लेते थे। बाद में, उस मुद्दे पर काम करना उनका मिशन बन जाता था। उनके सहयोगी और पर्सनल असिस्टेंट भी दिन-रात काम करते थे क्योंकि जनता के मुद्दे सुशील मोदी की सबसे बड़ी प्राथमिकता थे।
अपने भाषण के आखिर में जेसी मोदी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, “सुशील मोदी हमें बहुत जल्दी छोड़कर चले गए। आप सभी से मेरी अपील है कि आप हमेशा उनकी ईमानदार राजनीति, अनुशासन और जनसेवा को याद रखें।” जयंती समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। सभी ने सुशील मोदी को श्रद्धांजलि दी, उनके योगदान को याद किया और बिहार की राजनीति में उनके स्थान को ऐतिहासिक बताया।
Published on:
05 Jan 2026 05:06 pm
बड़ी खबरें
View Allबिहार चुनाव
पटना
बिहार न्यूज़
ट्रेंडिंग
